मध्य रात्रि का समय था आसमान में बादल छाए हुए थे हल्की हल्की रिमझिम रिमझिम बारिश हो रही थी ऐसे ही मौसम में वृद्ध आश्रम के कोने वाले पलंग पर ऐक बूढ़ा आदमी कराह रहा था शायद उसे ज्वर था तभी तो वह बार-बार करवटें बदल रहा था कभी कभी वह कुछ समय के लिए नींद के आगोश में चला जाता था जहां वह सपने में आसमान का विचरण करने लगता था कभी कभी वह अतीत कि सुनहरी यादें में खो जाता था उन सुनहरी यादें में उसके चेहरे पर मुस्कान खिल जाती थी तब कभी वह अपने बुरे समय को याद करके सिहर उठ जाता था तब कभी अर्ध चेतना में कुछ बड़बड़ाने लगता था ऐसे ही वह अतीत में चला गया था। जी हां उसका नाम सेठ धनीराम था मुंबई में कपड़े का बहुत बड़ा व्यापार था खुद कि टेक्सटाइल कंपनी थी अनेकों नोकर चाकर थे बड़ा बंगला था बड़ी बड़ी महंगी गाड़ियां कारें थी पत्नी थी तीन प्यारी प्यारी बेटियां जिन्हें उन्होंने बड़े लाड़-प्यार से पाल पोस कर तैयार किया था उस समय के सबसे अच्छे कालेज में पढ़ाया था सब कुछ अच्छा चल रहा था लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था अचानक उसे व्यापार में घाटा होने लगा था शायद बाजार से उसकी पकड़ कमजोर हो गई थी या फिर ...
देशभर के बड़े बड़े अखबारों ने माननीय नेता जी के स्वर्गवास पर खेद व्यक्त किया था साथ ही उनके मृत्यु का समय और शव यात्रा का समय भी लिखा था कुछ अखबारों के संपादक ने तों माननीय नेता जी बड़े बड़े लेख लिखकर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित कि थी तब कुछ संपादक महोदय ने ऊनकि जीवनी ही लिख डाली थी तब कुछ संपादक महोदय ने उन्होंने देश के लिए कैसा योगदान दिया लिखा था कुछ आलोचक संपादक ने जीवन में नेता जी ने कैसे कैसे मुकदमा का सामना किया जैसे कि बलात्कार मारपीट भूमी पर जबरदस्ती कब्जा भ्रष्टाचार जैसे संवेदनशील मुद्दे का कानूनी सामाना किया लेकिन नेता जी ने सफेद कुर्ता पायजामा पर दाग नहीं लगने दिया खैर मिस्टर खन्ना ने कलाइ घड़ी पर नजर डाली थी दस बजे शव यात्रा में शामिल होना था उन्होंने तुरंत अपने दोस्त रबि कांत को फोन किया था। खन्ना जी :- हैलो हैलो रबि रविकांत :- अलसाई आवाज में हां जी खन्ना जी सुबह सुबह कैसे याद किया खन्ना जी :-अबे क्या रात को ज्यादा पी ली थी शायद बिस्तर पर है और अरे हा वह तेरी गर्ल फ्रेंड.... रविकांत :- ही ही ही अरे यार उसकी सुबह चार बजे न्यूयार्क कि फ्लाइट थी चली गई अच्...