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Love

न जाने क्यों कुछ दिनों से शुभम् को मन में बहुत बैचैनी 
महसूस हो रही थी न जाने क्यों उसने अपने आप से कारण तलाश करने का बहुत प्रयास किया था लेकिन वह नहीं समझ पा रहा था इस विषय पर उसने डाक्टर से चेकअप कराया था उसकी सभी रिपोर्ट सामान्य थी फिर यह  बैचैनी क्यों क्यों 
कभी कभी तो वह सारी सारी रात करवटें बदलते हुए निकाल देता था लेकिन नींद नहीं आती थी हर समय मन अंसात रहता था लेकिन क्यों 
ऐसे ही एक बरसात कि रात में वह करवटें बदल रहा था तभी एकाएक उसने मोबाइल नंबर डायल किया था तीन चार वार भी डायल करने के बाद अलसाई आवाज में कहा गया 
क्या हुआ मैंने मना किया था ना कि मुझे फोन मत करना 
शुभम रूचि शायद यही नाम था प्लीज मुझसे बात किजिए 
रूचि :-अब क्या हुआ देखिए हमारे तलाक का अदालत में मुकदमा चल रहा है हम जल्दी ही कानून से अलग-अलग रहने लगेंगे 
शुभम :- रूचि देखो आज भी हम साथ साथ रह सकते हैं में तुम्हें अपनी आत्मा कि गहराई से चाहता हूं और देखो .
उसकी बात पूरी रूचि ने सुनी ही नहीं थीं तभी मर्दाना आवाज में उसे सुनाई दिया था कौन हैं रूचि ने मेरा बेचारा पति 
फिर रूचि ने मोबाइल चालू ही छोड़ दिया था और किसी मर्द के साथ रोमांस में लिप्त हो गई थी 
शुभम के कानों में हल्की हल्की सिसकारियां मीठी-मीठी बातें और  न जाने क्या क्या सुनाई दे रहा था ऐसी आवाज को सुनते ही उसे लगा कि जैसे कानों में किसी ने खोलते हुए तेल कि कुछ बूंदें डाल दी थी अब वह और बैचैन हों गया था उसने मोबाइल को दीवार पर फेंक कर मार दिया था फिर वह अतीत में खो गया था हां वह भी ऐसे ही दिन थे ऐसी ही बरसात हो रही थी जब वह उस आइ टी कंपनी में इंटरव्यू देने के लिए गया था हां वहीं तो थी जिसने ऐ आई 
प्रोग्राम के लिए बहुत सारे प्रोग्राम दिए थें हां वहीं तो थी जिसके बड़ी बड़ी आंखें पतले पतले गुलाबी ओंठ चोडा चमकदार चेहरा सुतवा नाक को देखकर वह ख्यालों में खो गया था हां वहीं तो थी जिसने उसे समझाया था कि मिस्टर आप इंटरव्यू के लिए आए हैं 
खैर उसने सभी प़ोग़ाम हल कर दिए थे हाथों हाथ उसे ज्वायनिंग लेटर मिल गया था अच्छी तनख्वाह के साथ 
चूंकि वह बेंगलुरु से अनजान था उसने  सहज भाव से कोई अच्छा फ्लेट किराए पर उपलब्ध कराने का कहां था तब हां वहीं तो थी जिसने खुद के फ्लेट में उसे रहने का कहां था 
लिखना जारी जल्दी दूसरा भाग 




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