कहते हैं कि मन से जीते जीत है मन से हारे हार अब मन क्या है सरल शब्दों में कहुं मन मस्तिष्क का दोस्त है दोनों ही ऐक सिक्के के पहेलू है दोनों ही मिल जुलकर शरीर को कमान देते हैं मतलब शरीर को चलाते हैं ठीक है अब सवाल उठता है कि शरीर क्या है कैसे काम करता है तब सरल शब्दों में शरीर यूं तो हाण मांस का ढांचा है जिसके अंदर करोड़ों छोटे छोटे जीव रहते हैं और अपने हिस्से का काम करते हैं यूं कहें कि शरीर खुद ऐक सृष्टि है जो पंचतत्व से घिरा हुआ हैं अब सवाल उठता है कि पंचतत्व कौन है आकाश जल अग्नि वायु और धरती ठीक है लेकिन यह सब भी मन से चलते हैं हम जैसा सोचते हैं वैसा ही हमें परिणाम मिलता है हम बैसे ही बन जाते हैं।
कहीं पढ़ा था कि किसी देश के किसी कैदी को न्यायलय ने फांसी कि सजा सुनाई थी समय निश्चित था तारीख निश्चित थी लेकिन वैज्ञानिक कुछ सोध करना चाहते थे उन्होंने माननीय न्यायालय से परमीशन लेकर ऐक प्रयोग किया था उस कैदी कि आंखों पर पट्टी बांध कर उसके पैर पर काटे से खरोंच कर उसे बताया कि तुम्हें सांप से डसवाया गया है बस इतना सुनते ही उस कैदी ने उनकी बात अपने मन में रख ली मन ने मस्तिष्क को ट्रांसफर कर दी फिर परिणाम आश्चर्यजनक निकला गया था उस कैदी ने कुछ ही देर में तड़पते हुए प्राण त्याग दिए थे यह ऐक मन कि शक्ती का उदाहरण है अच्छा कभी कभी हम अपने आप में मुझे लगता है कि मैं बीमार हो रहा हूं ऐसा मान लेते हैं फिर हम डाक्टर के पास जाते हैं अपनी परेशानी बताते हैं डाक्टर हमें लम्बा चौड़ा लेक्चर देने के साथ पैसा और बहुत सारी दबाई देता है लेकिन मजे कि बात यह है कि हम बीमार ही नहीं थे हमारे मन में जो ख्याल आया हमने मान लिया यही हमारी सबसे बड़ी चूक थी भूल थी ।
माना कि यह समय बहुत कठिन है यह समय धन कमाने का हैं और सच है इस समय धन के बिना जीवन व्यर्थ है इस धन के चक्कर में हम दिन रात मेहनत करते हैं आफिस में हमें टारगेट दिया जाता है कि यह प्रोजेक्ट आज ही कंप्लीट करना है ऐसे में हम कंप्यूटर लेपटॉप पर अपनी आंखें गड़ाए हुए काम करते हैं कभी कभी तो हम घर पर भी जो समय पत्नी बच्चों को देने का था उसमें भी काम करते हैं परिणाम स्वरूप हमारे परिवारिक जीवन के रिश्ते दूर होते जाते हैं और हम तनाव में चलें जाते हैं हमें चिड़चिड़ापन आने लगता है हम अवसाद में चलें जाते हैं अवसाद ऐक ऐसा गहरा कुआं है कि जिसमें से बाहर निकल जाना मुश्किल लगता है और हैं भी लेकिन हम एकांत में बैठकर अपने मन से बातचीत करें शांति से सभी परिस्थितियों को देखे तब हमारा मन ही हमें गहरे कुएं से बाहर निकल जानें का रास्ता दिखा देगा हमनें देखा है और पड़ा भी है बड़े बड़े दार्शनिकों को मन ने बनाया है ।
मिस्टर आ मेरे अच्छे दोस्त थे बहुत हंसमुख थे शालीन स्वभाव से थे हष्ट-पुष्ट थे दूर से देखने पर वह बहुत स्वस्थ दिखाई दे रहे थे लेकिन परेशान थे कारण उनकी पत्नी ने उन्हें शक्कर खाने से मना कर दिया था उनकि पत्नी का मानना था कि शक्कर खाने से शुगर कि बीमारी हो जाती है जो शरीर को खोखला कर देती है मोटापा बड़ा देती है बस मिस्टर आ ने पत्नी कि बात को मन में रख लिया कुछ दिन बाद उन्हें लगा कि सचमुच उन्हें शुगर हों गई है फिर क्या था डाक्टरों ने चेक किया शुगर ही निकलीं अब दवाइयां के साथ खाना क्या खाना चाहिए कितना खाना चाहिए कब खाना चाहिए सब कुछ डाक्टर ने लिखकर दिया मिस्टर आ तों थे मीठा खाने के शौकिन बेचारे गुलाब जामुन मिठाइयां देखकर मुंह में पानी आ जाता लेकिन नहीं खाते कारण पता था कि कहीं शुगर ज्यादा नहीं हों जाए अब यहां पर यह देखना होगा कि मिस्टर आ पूर्ण रूप से स्वस्थ थे पत्नी ने उनके मन में शक्कर का डर भर दिया मन ने माइंड को आदेश दिया और माइंड ने शुगर के किटाणु पैदा कर दिए थे अब समझने कि यह बात है यह सबकुछ कैसे हुआ उत्तर मन से ऐक दिन बहुत परेशान थे मैंने हंसते हुए कहा कि अरे कौन सी बीमारी कैसी बीमारी शुगर तो होती ही नहीं आप अपने मन से चिकित्सा करें शांत बैठे ध्यान करें और सुबह टहले फिर देखिए आप को बीमारी का स्वर्गवास हो जाएगा उन्होंने ऐसा ही किया आज स्वस्थ हैं खूब मीठा खाते हैं ।
ऐक रिपोर्ट के अनुसार कैंसर किडनी जैसी घातक बीमारी हमारे खान पान से आती है ऐसा खान-पान जो बदनाम हैं जैसे कि मांस मदिरा जी हां में भी इसका समर्थन नहीं करता लेकिन जो इस प्रकार के भोजन का सेवन करते हैं उन्हें बार-बार डराया जाता है कि देखना ऐक दिन तुम्हारा लीवर खराब हो जाएगा ऐक दिन तुम्हारी किडनी फेल हो जाएगी देखना जल्दी ही तुम्हें कैंसर हों जाएगा अब यहां समझने कि यह बात है उस व्यक्ति के मन में हम डर भर रहें हैं बार बार डर भर रहें हैं धीरे-धीरे उसका मनोबल डाउन हों रहा है वह अपने आप को कमजोर समझने लगा है चिकित्सक के पास जाता है सारी जांच करवाता है मजे कि बात यह है कि जिस बीमारी का उसके मन में डर भर दिया था वहीं निकलती है अच्छे खासे आदमी को हम बीमार कर देते हैं ऐसा में नहीं कहता मैंने अपने जीवन में कुछ दोस्तों को देखा है ।
इसलिए कहते हैं मन से बड़ा कोई मित्र नहीं मन से सच्ची दोस्ती निभाइए और ऐसी भागदौड़ भरी जिंदगी में अवसाद बीमारी से दूर रहिए ।

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