सावन का महिना था आसमान में बादल कि घटाएं छाई हुई थी कहीं कहीं रिमझिम रिमझिम बारिश हो रही थी दूर कहीं बिजली चमक रही थी और उसके बाद बादलों ने भीषड़ गर्जन कि थी ऐसा लगता था कि किसी पेड़ पर या देवालय पर बिजली गिर गई थी ऐसे ही मौसम में कुंवारी लड़की सेठ लछ्मी चंद्र के साथ साहचर्य में लिप्त थीं सेठ लछ्मी चंद्र उस लड़की के पिता जी कि उम्र का था लेकिन विस्तर पर सारे दांव पेंच लगाकर अपनी पहलवानी दिखा रहा था कुछ मिनट बाद वह कुंवारी लड़की उस कि छाती पर सिर रखकर सुनो क्यों न हम शादी कर लें । ललिता प्यारी तुम्हें मालूम है कि अपने देश का कानून दो शादियां कि परमीशन नहीं देता फिर मैं पहले से शादीशुदा हूं दो बच्चों का पिता हूं बेटी तेरी उम्र कि है ठीक है हम लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे हैं आजकल तो कानून भी ऐसे जोड़ों का सपोर्ट करता है फिर परेशानी क्या है अभी तो बेबी गर्ल मज़े लो लेकिन कभी में गर्भवती हो गई तब क्या होगा ललिता ने प्यार से प्रश्न किया सेठ लछ्मी चंद्र कुछ समय खामोश रहा फिर हम प्रोडक्शन का ध्यान रखते हैं ठीक मत चिंता करना भारतीय संस्कृति में रखैल शब्द को इज्जत नहीं मिल...