मध्य रात्रि का दूसरा पहर था आसमान में बादल छाए हुए थे और कभी तेज़ तों कभी रिमझिम बारिश कर रहे थे दूर कहीं आसमान में बिजली चमक रहीं थी उसके चमकने के कुछ सेकंड बाद भीषण गर्जन करने लगे थे ऐसा लगता था कि किसी पेड़ पर या फिर देवालय पर बिजली गिर गई थी अब गर्जन थमने के बाद कुत्तों को भी आपस में संवाद करने का मौका मिल गया था तभी तो गांव के सभी गली के कुर्ते भोंक भोंक कर ऐक दूसरे का हालचाल पूछ रहे थे कि सब कुशल मंगल तों है ना सभी भाई-बंधु सुरक्षित है ना? एसे ही मौसम में बूढ़े आदमी ने पत्नी से सुनतीं हों जरा मुझे पानी पिला देना तकलीफ के कारण उसके मुंह से ठीक-ठाक शब्द भी नहीं निकल पा रहे थे । बुढ़िया खटिया पर से उठ कर पानी पिलाया था फिर आज तुम्हारी तबियत ज्यादा ख़राब है में बेटों को जगातीं हूं और अभी गांव के डाक्टर के पास लें जाने का कहतीं हू चिंतित होते हुए उन्होंने कहा था। बूढ़े आदमी कि सांस तेज चल रही थी पेट में पानी जाने के बाद कुछ पलों के लिए आराम मिला था तभी तो उसने कहा था बेटों को जगाने से कोई फायदा नहीं होने वाला ऐसा लगता है कि अब धरती पर हमारा समय पूरा होने ...
हमारे बारे में
नमस्कार
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मेरा नाम महेन्द्र सिंह ठाकुर है मेरा जन्म मध्यप्रदेश भारत देश के छोटे सा ज़िला छतरपुर गांव में हुआ था।
हिन्दी साहित्य पर आधारित परिवारिक सामाजिक व्यवस्था पर आधारित दिल को छूने वाली स्वरचित कहानियां।
आज कल हमारे परिवारिक रिश्ते लगभग न के बराबर ही बचें हुए हैं माता पिता असहाय होकर अपना अंतिम सफर कष्ट से व्यतीत करते हैं कहते हैं कि बुढ़ापे कि लाठी संतान होती है वही संतान अपने कर्तव्य को भूल जाती है जो गलत है पति-पत्नी के रिश्ते तलाक पर कुछ गलतफहमियां में पहुंच जाते हैं ।
प्रकृति का हम दोहन कर रहे हैं ऐसे में हमें कहीं अल्प बारिश तब कही अति बारिश का सामना करना पड़ता है कहीं हिमस्खलन हो रहा है ऐसे भी विषयों पर अच्छा लिखने का उद्देश्य है समाज को जागरूक करने का मेरी रचनाएं में देखने को मिलता है ।
मैं स्वस्थ साफ शब्दों में लिख रहा हूं कि मेरी कलम से हमेशा सकारात्मक सोच ही मिलेंगी ।
भूल चूक हो तब मेरा मार्गदर्शन किजिऐगा धन्यवाद
आप कभी भी संपर्क कर सकते हैं मेल आईडी यह है।
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