मध्य रात्रि का दूसरा पहर था आसमान में बादल छाए हुए थे और कभी तेज़ तों कभी रिमझिम बारिश कर रहे थे दूर कहीं आसमान में बिजली चमक रहीं थी उसके चमकने के कुछ सेकंड बाद भीषण गर्जन करने लगे थे ऐसा लगता था कि किसी पेड़ पर या फिर देवालय पर बिजली गिर गई थी अब गर्जन थमने के बाद कुत्तों को भी आपस में संवाद करने का मौका मिल गया था तभी तो गांव के सभी गली के कुर्ते भोंक भोंक कर ऐक दूसरे का हालचाल पूछ रहे थे कि सब कुशल मंगल तों है ना सभी भाई-बंधु सुरक्षित है ना?
एसे ही मौसम में बूढ़े आदमी ने पत्नी से सुनतीं हों जरा मुझे पानी पिला देना तकलीफ के कारण उसके मुंह से ठीक-ठाक शब्द भी नहीं निकल पा रहे थे ।
बुढ़िया खटिया पर से उठ कर पानी पिलाया था फिर आज तुम्हारी तबियत ज्यादा ख़राब है में बेटों को जगातीं हूं और अभी गांव के डाक्टर के पास लें जाने का कहतीं हू चिंतित होते हुए उन्होंने कहा था।
बूढ़े आदमी कि सांस तेज चल रही थी पेट में पानी जाने के बाद कुछ पलों के लिए आराम मिला था तभी तो उसने कहा था बेटों को जगाने से कोई फायदा नहीं होने वाला ऐसा लगता है कि अब धरती पर हमारा समय पूरा होने वाला है यमराज के दूत दिखाई दे रहे हैं वह अब मुझसे कह रहे हैं कि जल्दी चलो तुम्हारा समय पूरा हो गया है देखो देखो यह यही पास में आ गया है मेरे गले कि और अपने हाथ बड़ा रहा है अरे देखो काला भैंसें जैसा है उसके सिर पर बहुत बड़े बड़े नुकेले सींग है अच्छा चलता हूं भाई जरा मुझे अपनी पत्नी से दो बातें करने तों दिजिए फिर पक्का चलता हूं ।
देखो हम दोनों ने जीवन के साठ साल साथ में गुज़ारे है दुःख सुख में हमेशा ऐक दूसरे का साथ दिया है में चाहता हूं कि मेरे जानें के बाद तुम दुखी नहीं रहो जमाना बहुत खराब है आजकल धन के बिना बेटा बहूं पेट के लिए दो रोटी भी नहीं देते हैं मेरे पास जो भी धन था वह बेटों ने पहले ही ले लिया था लेकिन मेरे पास एक गुप्त मंत्र है उसी के कारण हमें भरपेट भोजन मिलता रहा जरा कान मेरे मुंह के पास लगा देना में गुप्त मंत्र दे रहा हूं इस मंत्र का ध्यान रखना यही तुम्हारा सबसे बड़ा धन है।
बुढ़िया ने अपने कानों को बुड़े आदमी के मुंह के पास लगा दिया था कुछ बुदबुदाते हुए बूड़ा यमराज के दूत के साथ दूसरी दुनिया में चला गया था।
अर्ध रात्रि में ही घर के अन्दर रोना चालू हों गया था आस पास के पड़ोसी भी आ गये थे सभी सुवह होने का इंतजार कर रहे थे ताकि जल्दी अंतिम संस्कार करके इस निर्जीव देह से छुटकारा पा सके ।
सभी क्रिया कर्म करने के बाद तेरहवीं कि तैयारी चल रही थी दोनों बेटे मेहमानों कि लिस्ट तैयार कर रहे थे साथ ही भोजन में मिठाई कौन कौन सी बनवाना चाहिए सब्जी कितने प्रकार कि रहेंगी ब्राह्मणों को दक्षिणा कितनी-कितनी देनी चाहिए सभी विषयों पर गहन मंथन चल रहा था पास में ही बुढ़िया बैठी थी सब कुछ सुनने के बाद उसने कड़क आवाज से कहां था।
पूड़ी मिठाई सब शुद्ध देसी घी से बनेगा कहें देती हूं ।
लेकिन अम्मा पैसा तो बहुत खर्च होगा बड़े बेटे ने आपत्ति जताई थी
अम्मा तुनककर हां तों होने दिजिए सब कुछ तुम्हारे पास उन्हीं कि कमाई का तों हैं सारे जीवन जी तोड़ मेहनत करके तुम्हारे लिए जमीन मकान टेककर कार मोटरसाइकिल सब व्यवस्था करके गये हे शुद्ध देसी घी कि सुगंध दूर आसमान तक जाएगी जहां तुम्हारे पिता बैठे हुए हैं उस सुगंध से वह भी भोजन कर लेंगे जीते जी उन्होंने कभी भी नकली तेल कि पूड़ी सब्जी नहीं खाईं थी और अब .. तुम्हें ज्यादा खर्च दिखाई दे रहा है ।
ठीक है अम्मा जैसा तुम कहो करेंगे लेकिन पिता जी कि तिजोरी से कुछ पैसा मिल जाता तब छोटे बेटे कि बात पूरी भी नहीं हुई थी अम्मा ने फिर तुनककर कहा था ।
मेरे जीते जी तिजोरी कि चाबी या किसी को नहीं मिलेगी कहें देती हूं मरने के बाद सब कुछ तुम दोनों का है में भला ऊपर भगवान् के पास पीठ पर लादकर थोड़े ले जाऊंगी।
छोटा बेटा चालाक था मन ही मन सोचकर अम्मा कितने दिनों कि मेहमान है दो चार साल उसके बाद तो धन हमारा ही है और इस बीच कभी मौका मिलता है तब सारे धन अपने कब्जे में कर लूंगा बड़े भैया को पता भी नहीं चलेगा।
बड़ा बेटा भी मन ही मन अम्मा कि खूब सेवा करूंगा तब शायद ख़ुश होकर तिजोरी का सभी धन चुपचाप मुझे पकड़ा दे फिर छोटे को पता भी नहीं चलेगा।
अम्मा अब अपनी शर्तों पर बहूओ और बेटों पर राज कर रही थी सुबह जागकर नित्य कर्मों से निवृत्त होकर भगवान का भजन करने लगतीं थी पूजा पाठ से जैसे ही फुर्सत होती थी तुरन्त गर्म गर्म भोजन कि थाली सामने आ जाती थी दिन भर में चार पांच बार चाय पीने लगी थी जब अम्मा नहाकर गुसलखाने से बाहर आती थी तब उनकी साड़ी कपड़े धोने के लिए दोनों बहुएं में होड़ लगी रहतीं थीं ।
अम्मा रोज तिजोरी को खोलती थी उसके अंदर हाथ डालकर सामान इधर-उधर करती थी खटपट कि आवाज बेटा बहुओं के कानों में जैसे ही जाती थी तुरन्त तिजोरी बंद कर देती थी और चाबी या तो साड़ी के पल्लू में बांधकर रखती थी मजाल कि कोई सोते हुए भी चाबी लेने कि चेष्टा करें जरा सी आवाज सुनकर तुरंत चौकन्नी हो जातीं थी मतलब अब उनकी नींद कच्ची हों गई थी ।
वह भी वर्षांत कि रात्रि थी आसमान में वैसे ही बादलों ने उत्पाद मचाया हुआ था वैसे ही वह गरज रहे थे वैसे ही कुत्तों को भोंकने का मौका मिल गया था वैसे ही कभी तेज़ तब कभी रिमझिम बारिश हो रही थी वैसे ही रात्रि के दूसरे पहर में अम्मा शांती से दूसरी दुनिया में चलीं गईं थीं वैसे ही घर में रोना गाना चल रहा था।
गांव वाले बाहर अर्थी तैयार कर रहे थे सूखी लकड़ियां हर घर से आ रही थी और घर के अन्दर अम्मा कि तिजोरी कि चाबी या पर बहस हो रही थी ।
भैया में चाहता हूं कि अम्मा कि अंतिम संस्कार से पहले हमें तिजोरी का धन वाट लेना चाहिए यहीं तो अम्मा का आदेश था कि मेरे मरने के बाद सब कुछ तुम दोनों का ही तो है छोटे बेटे ने कहा था।
तूं समझ क्यों नहीं रहा है देख घर के बाहर गांव वाले सभी बैठें हुए हैं अभी मौसम भी साफ हैं पहले हम अंतिम संस्कार करेंगे उसके बाद तिजोरी खोलते हैं बड़े भाई ने कहा था।
नहीं में नहीं मानने वाला इस बीच चाबी या किस के पास रहेंगी तुम्हारे पास कभी नहीं पता भी नहीं चलेगा कि कब तिजोरी पर हाथ साफ कर दोगे छोटे ने तेज आवाज से अपनी शंका जताई थी ।
अच्छा बच्चू अब समझा तब तुझे चाबी या चाहिए नहीं मिलेगी ठीक है बड़े भाई ने और तेज स्वर में बोला था।
दोनों भाई कि आवाज बाहर सुनाई दे रही थी गांव के बुजुर्ग आदमीयों ने उन्हें समझाया था लेकिन वह दोनों तो जिद पर अंडे हुए थे ।
निर्जीव देह घर के अन्दर पड़ी हुई थी जो पल पल ख़राब हो रही थी गांव के ऐक व्यक्ति ने पुलिस को सूचना दी थी कुछ देर बाद पुलिस आ गई थी इंस्पेक्टर ने सब कुछ समझकर अम्मा के कमरे को तिजोरी को सीलबंद कर दिया था तेरहवीं के बाद गांव वालों और पुलिस कि निगरानी में तिजोरी खोलने का फैसला हुआ था।
मृत्यु भोज से निवृत्त होकर तिजोरी खोली गई थी अंदर पत्थर पुराने कपड़े रखे हुए थे सोना चांदी रूपए कुछ भी नहीं थे दोनों बेटे ऐक दूसरे का मुंह देख रहे थे और गांव वाले अम्मा कि सूझबूझ कि तारीफें कर रहे थे अम्मा को बूढ़े पति ने जो गुप्त मंत्र दिया था वह काम कर गया था ।
सीख आधुनिक युग में धन बहुत जरूरी है धन को अपने पास बचाकर रखना चाहिए।
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