शाम का समय था गांव के किसान अपने अपनी गाय भैंसे लेकर खेतों से घर लौट रहे थे उन गायों कि गोधूलि छोटे-छोटे टुकड़े में आसमान में उड़ रहे थे और गाये कदमताल मिलाते हुए घर जा रही थी कुछ गायों के गले में घंटी बंधी हुई थी उन घंटियों कि टनटनाहट से मधुर संगीत सुनने को मिल रहा था बीच बीच में कुछ गाये उछल-कूद कर रही थी पन्ना लाल भी इन सभी के साथ गाय भैंसे लेकर घर जा रहें थे घर जाकर उन्होंने गाय भैंसे को खूंटे से बांध कर उन्हें चारा डाला था फिर हाथ मुंह धोकर अरे सुनतीं हों पत्नी को आवाज देकर कहा
जी हां बोलिए
में कल इन्दौर जाना चाहता हूं दो दिन में वापस आ जाऊंगा ।
गाय भैंसे कि सेवा कोन करेगा पुनिया ने कहा था पुनिया पन्ना लाल कि धर्मपत्नी का नाम था
दो दिन तुम सम्हाल लेना लल्लू को गाय का शुद्ध घी दे आऊ सुना है शहर में दुध घी मिलावट का मिलता है भाइ अपना बेटा अफसर है कहते हैं डिप्टी कलेक्टर पुनिया यह सब तेरे पुन्य प्राप्त का फल है ।
लल्लू पन्ना लाल का बेटा था प्यार से माता पिता लल्लू कहते थे लेकिन शहर में उसका नाम लाला राम था बचपन से ही पड़ने लिखने में होशियार था तभी तो दोनों पति-पत्नी ने छोटी सी खेती गाय भैंसे के दूध घी बेचकर उसे पढ़ाया था ।
पन्ना लाल गांव कि भेष-भूषा में शहर पहुंच गए थे घी कि हांडी साथ थी लाला राम के आफिस पहुंच कर उन्होंने चपरासी से कहा था कि लल्लू से कह कि गांव से दद्दा आऐ है घी लेकर।
लल्लू कौन लल्लू यह कलेक्टर का आफिस है यहां कलेक्टर साहब बैठते हैं चपरासी ने ऊपर से नीचे तक देखा था शायद वह पन्ना लाल कि औकात देख रहा था विडम्बना है कि इंसान के कपड़ों से ही उसके व्यक्तित्व कि पहचान होती है ।
चपरासी ने फिर से तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है बुड्ढा यह कलेक्टर लाला राम का आफिस है समझें अब तुम यहां से निकल जाओ वरना मुझे मजबूर होकर पुलिस बुलाना होंगी।
पन्ना लाल ने मूझो पर ताव देकर हां हां वही तेरा कलेक्टर लाला राम में उसका बाप हूं जाकर कह कि दादा आए हैं ।
चपरासी को अब कहीं ना कहीं उनकी बात में बजन समझ में आ रहा था वह चेमबर के अंदर गया था फिर साहब अभी मीटिंग में व्यस्त हैं इतंजार करना पड़ेगा ।
पन्ना लाल वहीं बरामदे में पट्टी पर बैठ कर इंतजार कर रहे थे घंटा बीता फिर दो घंटा फिर शाम हों गई थी दफ्तर बंद होने लगें थे उन्होंने चपरासी से कहा कि तुम्हारे साहब कि मीटिंग अभी चल रही है क्या ।
साहब तों बंगले के लिए निकल गये पीछे के दरवाजे से हां उन्होंने आप को बंग्ले पर आने का कहां है ऐसा करना यहां से बाहर नम्बर बस निकलेंगी उस पर बैठ जाना वह वहीं ..
समझ गया भैया जरा पैन कागज़ देना तुम्हारे साहब के लिए चिट्ठी लिखकर देना चाहता हूं और हां भैया इसमें पांच किलो घी है शुद्ध गाय के दूध का घर ले जाना ।
चपरासी ने घी कि हांडी पर नजर डाली थी दोडकर कागज पेन लाया था ।
प्रिय बेटा
कैसे हों मेरे ख्याल से तुम अच्छे हों भाई बड़े अफसर जो बन गए हों ठीक है क्या तुम्हें मालूम है तुम्हारे जन्म के लिए हम दोनों पति-पत्नी ने मंदिर मंदिर जाकर प्रार्थना कि अच्छा तुम्हें मालूम है कि तुम बीमार रहते थे तब तुम्हारी मां और मैं सारी रात जागकर तुम्हारे सेवा करते थे उस समय के सबसे मंहगे डाक्टर से तुम्हारा इलाज कराया था बेटा जैसा कि तुम्हें मालूम है कि हम बहुत गरीब है हमारे पास थोड़ी सी जमीन और गाय भैंसे ही है लेकिन तुम्हें पता है हमने कभी भी तुम्हें गरीबी का एहसास नहीं कराया बचपन से ही अच्छे स्कूल में पढ़ाया लिखाया महंगे कपड़े पहनाए और तुम्हें मालूम है मेरे पास साइकिल भी नहीं तुम्हें मोटरसाइकिल दी मोबाइल दिलाए लेपटाप दिलाया अब तुम कहोगे कि यह तो सभी माता पिता करते हैं ।
बिल्कुल हर माता-पिता अपनी औलाद को सफल देखना चाहता है क्यों कि औलाद सी उसके जीवन कि जमा पूंजी है बुढ़ापे कि लाठी हैं लेकिन अब शायद जमाना बदल गया है सुनने में आता है बुढ़ापे में पड़ी लिखीं औलाद मां बाप को वृद्ध आश्रम में छोड़ देती है जहां वह मां बाप रोज तिल तिल कर मरते हैं ।
बेटा में उनमें से नहीं हूं मेरा स्वाभिमान अभी जिंदा है और हाथों में ताकत अपना जीवन आराम से शानदार तरीके से गांव में व्यतीत करूंगा लेकिन मैं शर्मिन्दा हूं तुम्हारे जैसी औलाद को पाकर या तो मैंने तुम्हें अच्छे संस्कार नहीं दिए या फिर तुम्हें घंमड आ गया ठीक है वह तुम्हारी परेशानी हैं लेकिन आज जो तुमने मेरे साथ किया अच्छा रहा मेरी आंखें खुल गईं आज से हमारा तुम्हारा कोई संबंध नहीं गांव मत आना समझें रही बात तेरी मां कि मेरे से बेहतर कौन समझ सकता हैं मेरा अपमान वह कभी सहन नहीं कर पाएगी ।
यह कहानी आप को कैसी लगी कमेंट करके बताइए

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