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अपना घर कहानी


 शाम का समय था आसमान में बादल छाए हुए थे हल्की हल्की रिमझिम बारिश हो रही थी कहीं दूर बिजली चमक रही थी ऐसे ही मौसम में अविनाश धीरे धीरे मोटरसाइकिल चलाते हुए घर जा रहें थे चूंकि शाम को इन्दौर का ट्राफिक यूं ज्यादा हों जाता है लेकिन आज भारी ट्राफिक साथ ही पानी बरसना इसलिए दो पहिया वाहन चालकों को बहुत परेशानी आ रही थी खैर अविनाश धीरे धीरे बचते बचाते घर पहुंच गया था हेलमेट रेनकोट निकाल कर उसने मोटरसाइकिल पर ही टांग दिया था जैसे ही अन्दर पहुंचा देखा श्री मति अविनाश का चेहरा लाल है उसने प्यार से पूछा था।

क्या हुआ 

क्या नहीं हुआ आज मकान मालिक आया था दस बातें सुनाकर चला गया 

लेकिन क्यों हम किराया बिजली का बिल समय पर देते हैं अविनाश ने शांति से कहा था ।

सब्जी के छिलके बरामदे में पड़े हुए थे उस को देखकर भड़क उठा श्री मति अविनाश ने तुनककर जबाब दिया था 

ग़लती तुम्हारी हैं साफ सफाई रखनी चाहिए।

दौनो कि सहज भाव से बात चल रही थी तभी  बेटी आस्था बीच में आ गई देखिए पापा आप अपना घर कब लें रहें हैं बस अब घर लेना है 

परिवार में तीन सदस्य ऐक दूसरे से वाद-विवाद कर रहे थे इस बीच बेटा भी आ गया था जो टीन एज में था प्यार से सभी उसे पप्पू कहते थे वह भी बीच में कूद पड़ा था हां पापा हमें हमारा घर चाहिए  पता है पास कि कालोनी में मेरे दोस्त के पापा ने घर लिया ह हैं तीन बेडरूम हैं  .. बालों को झटकते हुए कहा।

अविनाश ने देखो जैसा कि तुम सबको मालूम है मेरी प्राइवेट नौकरी है आमदनी सिमित है और अभी तुम दोनों कि कालेज कि पढ़ाई हैं इन सब परस्थितियों को देखकर हमें अभी किराए के घर में रहना चाहिए ...

इंजीनियर हैं आप क्या नाम के इंजीनियर हैं अरे तुम्हारे दोस्त अतुल ने तीन तीन मकान ले लिए और तुम अभी किराए के घर में ही  रह रहें हों  अरे भाई जमाना लेन देन का हैं ऊपर का पैसा कमाना चाहिए तुम्हारे हाथ के नीचे दसों ठेकेदार काम करते हैं कमीशन क्यों नहीं लेते मेरे तो भाग्य फूट गये तुम्हारे जैसे आदमी के साथ ...

अविनाश जरा धीरे बोलो देखो बच्चे बड़े हो रहे हैं उन पर क्या असर पड़ेगा 

तब मैं कह देती हूं मकान लेना है तो लेना है पप्पू कल मुझे ले चलना तेरे दोस्त कि कालोनी कल ही फाइनल करते हैं।

अविनाश समझते क्यों नहीं हो तुम लोग होम लोन कि इस एम आई मकान किराया बच्चों कि पढ़ाई सभी खर्चे कैसे मैनज कर पाऊंगा दूसरा प्रतिस्पर्धा का युग है टेक्नोलॉजी दिन प्रति दिन बदल रही है हर साल लाखों नये युवा इंजीनियर कालेज से डिग्री लेकर कम तनख्वाह में भी काम कर रहे हैं कभी कभी मैं अपने आप को उनके बीच असहज महसूस करता हूं ऐसे में अभी घर लेना ठीक नहीं ।

अविनाश ने बहुत समझाया था लेकिन पत्नी बच्चे समझने के लिए तैयार नहीं थे उन्होंने घर भी देख लिया था और बैंक एजेंट से होम लोन कि बात भी कर ली थी अब बस कुछ पेपर पर अविनाश को सिग्नेचर ही करनें थे वह भी हों गये थे ।

कहते हैं जितना बड़ा चादर हों उतना ही पैरों को फैलाना चाहिए मतलब सुखी जीवन व्यतीत करने के लिए आमदनी के हिसाब से ही खर्च करना चाहिए यह सुखी जीवन व्यतीत करने का मूल मंत्र है।

अपना घर अपना होता है उसमें रहने का सुख ही अलग है पुरा परिवार किराए के घर से तीन बेडरूम वाले घर में आ गया था अब आस्था और पप्पू मेरा यह बेडरूम रहेगा मुझे यह खिड़की चाहिए आप में झगड़ रहे थे और श्रीमती अविनाश घर के पर्दे किस कलर के रहेंगे ड्राइंग रूम में  सोफा सेट कि डिजाइन क्या रहेंगी अकेली ही माथा पचची कर रही थी दूसरी ओर अविनाश यह सब खर्चे कैसे पूरे होंगे सोच रहे थे ।

घर लेने के बाद अविनाश का हाथ खाली था मतलब बैंक बैलेंस खत्म था ऊपर से हर महीने इ एम आईं जमा करनी पड़ती थी उधर बच्चों कि शिक्षा का मोटा तगड़ा खर्च महीने के आख़री तक चाय पीने तक का पैसा नहीं बचता था उधर दोनों बच्चे पढ़ाई पर कम ध्यान दें रहें थे सारे दिन सोशल मीडिया पर रील देखना और खुद के विडियो सूट करके डालना मतलब बच्चे लछय से भटक गये थे  ।

मोबाइल का अविष्कार निश्चित रूप से अद्भुत है मोबाइल ही हमें ऐक दूसरे से जोड़ता है सारे संसार कि जानकारी ऐक किल्क पर हमें मिल जाती है आजकल के दैनिक जीवन में मोबाइल कि हिस्सेदारी अनमोल है मतलब मोबाइल न हो तब बैचैनी होने लगतीं हैं मतलब मोबाइल आज हमारे दिमाग का अलग हिस्सा बन गया है निश्चित रूप से लाभकारी है लेकिन दूसरा पहलू यह है कि आजकल युवा पीढ़ी मोबाइल का दुरुपयोग ज्यादा कर रहे हैं सोशल मीडिया रीलस और वर्जित विडियो ज्यादा देखते हैं ऐसे में वह मानसिक रूप से कमजोर हो रहें हैं ।

कंपनी का नया हाईराइज विल्डिंग का प्रोजेक्ट आया था अविनाश को वह प्रोजेक्ट दिया गया था  मेहनत के साथ जवाबदारी बहुत थी अविनाश जी तोड़ मेहनत कर रहे थे लेकिन वह मेहनत कंपनी के मालिक को दिखाईं नहीं दे रही थी उनकी तनख्वाह नहीं बड़ी थीं  चूंकि खर्च ज्यादा था और घर पर भी श्री मति जी हमेशा ताने देती रहती थी ऐसे में वह अंदर से टूटने लगे थे हालांकि वह चाहते तब ऊपर कि आमदनी से सब कुछ अच्छा कर सकते थें लेकिन वह ईमानदार इंसान थे अपने खुद के बनाए हुए नियम को तोड़ना नहीं चाहते थे कहते हैं कि जब आदमी मन से थक जाता है तब उसके स्वभाव में चिड़चिड़ापन आ जाता है और शरीर भी रोगग्रस्त होने लगता है अविनाश का सुगर लेवल बढ़ने लगा था कभी कभी आंखों के सामने धुंधलापन छा जाता था कभी कभी चक्कर आने लगते थे 

ऐक दिन हाईराइज विल्डिंग कि चार मंजिल कि छत का सरिया चेक कर रहें थे एकाएक उन्हें चक्कर आ गया था छत से सीधे नीचे जमीन पर गिर पड़े थे थोड़ी देर में ही दुनिया छोड़कर चले गए थे ।

अपना घर जो पत्नी बच्चों ने उनसे जिद करके लिया था अब उस घर कि ई एम आई जमा नहीं हों पा रही थी श्री मति जी का घमंड टूट गया था बच्चे भी अपनी पढ़ाई लिखाई छोड़कर कहीं काम करने लगें थे श्री मति अविनाश भी कहीं काम कर रही थी मुश्किल से घर खर्च चल रहा था इसलिए कहते हैं कि जितना चादर हों उतने ही पैरों को फैलाकर रहना चाहिए ।

यह कहानी एक कहानी नहीं है वर्तमान समय में जो हमें देखने को मिलता है उस पर आधारित है चूंकि आधुनिक युग में समाज में अपना अलग स्टेटस दिखाने के लिए हम बैंक से बाजार से कर्ज ले लेते हैं मतलब दिखावे का जीवन चुन लेते हैं मेरे ख्याल से यह गलत है अच्छा यह कहानी आप को कैसी लगी कमेंट करके बताइए 










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