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गुप्त मंत्र Gupt Mantra emotional story

 मध्य रात्रि का दूसरा पहर था आसमान में बादल छाए हुए थे और कभी तेज़ तों कभी रिमझिम बारिश कर रहे थे दूर कहीं आसमान में बिजली चमक रहीं थी उसके चमकने के कुछ सेकंड बाद भीषण गर्जन करने लगे थे ऐसा लगता था कि किसी पेड़ पर या फिर देवालय पर बिजली गिर गई थी अब गर्जन थमने के बाद कुत्तों को भी आपस में संवाद करने का मौका मिल गया था तभी तो गांव के सभी गली के कुर्ते भोंक भोंक कर ऐक दूसरे का हालचाल पूछ रहे थे कि सब कुशल मंगल तों है ना सभी भाई-बंधु सुरक्षित है ना? एसे ही मौसम में बूढ़े आदमी ने पत्नी से सुनतीं हों जरा मुझे पानी पिला देना तकलीफ के कारण उसके मुंह से ठीक-ठाक शब्द भी नहीं निकल पा रहे थे । बुढ़िया   खटिया पर से उठ कर  पानी पिलाया था फिर आज तुम्हारी तबियत ज्यादा ख़राब है में बेटों को जगातीं हूं और अभी गांव के डाक्टर के पास लें जाने का कहतीं हू‌  चिंतित होते हुए उन्होंने कहा था। बूढ़े आदमी कि सांस तेज चल रही थी पेट में पानी जाने के बाद कुछ पलों के लिए आराम मिला था तभी तो उसने कहा था बेटों को जगाने से कोई फायदा नहीं होने वाला ऐसा लगता है कि अब धरती पर हमारा समय पूरा होने ...

प्राइवेट नौकरी के संघर्ष से .....भावुक कहानी


 हाइवे पर रोड निर्माण कार्य चल रहा था जे सी बी मिट्टी खोद रही थी उस मिट्टी को बड़े बड़े डंपर से दूसरी जगह भेजा जा रहा था चूंकि रोड निर्माण कार्य का डाइंग के मापदंड से हों रहा था रोड के लिए मिट्टी कितनी खोदना है वह सब डाइंग में लेवल के रूप में दर्ज था मतलब ज्यादा मिट्टी खोदने से कंपनी का नुकसान था ।

महेंद्र एसे ही कंट्रक्शन कंपनी में काम कर रहा था हालांकि वह कम पड़ा लिखा था लेकिन बीस साल इस फिल्ड में काम करने का अनुभव था लेवल ले-आउट क्वांटिटी क्वालिटी सभी में उसकी गहरी पकड़ थी तभी तो जिस कंपनी में भी वह नौकरी करता था तनख्वाह अच्छी मिलती थी साथ ही इंजीनियर लेवल कि पोस्ट भी मिलतीं थी ।
हालांकि प्राइवेट सेकटर कंस्ट्रक्शन कपनी कि नौकरी कभी स्थाई नहीं होती है जरा सी ग़लती और बाहर का रास्ता कब कंपनी दिखा दे एम्पलाई को पता ही नहीं रहता है ऐक दिन अच्छा निकल जाए तब मानों कोई बहुत बड़ी जंग जीत ली है ।

चूंकि गर्मी कि तपती दोपहर थी लूं गालों पर कानों पर थपेड़े मार रही थी ऐसे ही मौसम में महेन्द्र लेवल मशीन से जे सी बी आपरेटर को कितना खोदना है दस दस मीटर चेनल बना कर समझा रहा था जब उससे गर्मी सहन नहीं हुई तो वह नीम के पेड़ के नीचे बैठ गया था शरीर आराम मांग रहा था तभी तो वह गमझा सिर के नीचे रखकर लेट गया था।

पेड़ कि शीतल छांव में कब नींद आ गई थी पता ही नहीं चला था चार बजे जे सी बी आपरेटर ने उसे जगा कर साहब जरा लेवल चेक कर लिजिए  मैंने चालीस मीटर ऐक पट्टी खोद दी है आप को इसलिए नहीं जागना उचित समझा कि आप बुजुर्ग आदमी हैं फिर साहब गर्मी कैसी पड़ रही है  आपरेटर ने सरल शब्दों में कहा था ।

महेंद्र लेवल चेक कर ही रहे थे उसी समय जनरल मैनेजर साइट विचिट पर आए थें चमचमाती नई कार से बाहर निकल कर उन्होंने सिगरेट सुलगा ली थी ऊनकी नाक से धुआं किसी फेक्ट्री कि चिमनी जैसा निकल रहा था।

कड़कती आवाज से मुझे लेवल चेक कराइए मिस्टर देखकर लगता है कुछ गड़बड़ी है ।

जी सर आइए महेन्द्र ने कहा था।

टीबीऐम से बैकसाइड लेने के साथ उन्होंने एच आई बनाई थी फिर डाइंग लेकर रोड टाप को देखकर कैलकुलेटर से कुछ जोड़ा था कुछ घटाया था  लेवल मशीन पर जाकर ऐक आंख लगाकर स्टाप को पड़ कर ओह ऐक मीटर गहरी खुदाई ऐसी लापरवाही तुम क्या नींद लें रहें थें जी एम ने चिल्लाते हुए कहा था।

जी हां सर मैं पेड़ के नीचे नींद में चला गया था महेन्द्र ने विनम्र भाव से ज़बाब दिया था।

क्यों तुम्हारे घर का राज्य है मिस्टर ऐसी लापरवाही नहीं चलेंगी जी एम ने दहाड़ कर कहा था।

सर नाईट में दो बजे तक ड्यूटी पर था सुबह आठ बजे फिर आ गया था थक गया था इसलिए नींद आ गई थी ग़लती हो गई आगे ध्यान रखूंगा।

ओह अब समझा ग़लती कंपनी कि है जो पचपन साल के बुजुर्ग आदमी को काम दिया अच्छा रात्रि दो बजे तक ड्यूटी करके कंपनी पर एहसान कर दिया था यही कहना चाहते थे ना इस नुकसान कि भरा पाई कौन करेगा में तुम्हारा तनख्वाह से डेबिट करूंगा।

 जी एम के व्योहार से महेन्द्र कि आत्मा तार तार हो गई थी उन्होंने तब क्या दिन रात काम कराएंगे गुलाम समझते हैं क्या वह जमाना गया जब लोग गुलामी करते थे तुम्हारी कंपनी हमारे जैसे वर्करों का शोषण करतीं हैं जो ठीक नहीं है कुछ नियम कानून होते हैं दूसरी कंपनी उन नियमों का सख्ती से पालन करतीं हैं।

अच्छा बहसबाजी करोगे मिस्टर में तुम्हें अभी का अभी बाहर करता हूं समझें ।

हा हा अभी कर दें महेंद्र को भी ताव आ गया था।

दफा हो जाओ अभी मेरी साइट से जी एम ने कहा था ।

एसे कैसे दफा हो जाऊं तेरे घर कि कंपनी है क्या में भी नौकर और तूं भी मुझे अभी का अभी पैसा चाहिए समझा।

नहीं मिलेगा जा ‌

एसे कैसे नहीं मिलेगा बच्चू  तेरी रिपोर्ट दर्ज करवा दूंगा समझा।

रिपोर्ट का नाम सुनकर जी एम सहम गया था जैब से मोबाइल निकाला था फिर एच आर को फोन कर आज तक का महेन्द्र का पैसा अभी ट्रांसफर करना है दस मिनट के अंदर ठीक है ।

पैसा एकाउंट में आते ही महेन्द्र थके कदमों से बेरिंग चिट्ठी जैसे घर वापस जा रहें थें ऐक साल के अंदर तीसरी नौकरी छूट गई थी पत्नी बच्चों को क्या जवाब दूंगा कैसे घर खर्च चलेगा बेटा बेटी कि कालेज कि पढ़ाई का क्या होगा सोच सोच कर परेशान हों रहें थें  ।

क्या जीवन भर ऐसा ही संघर्ष करना पड़ेगा क्या कभी जीवन में सुख मिलेगा कभी ठहराव आएगा इतनी मेहनत करने के बाद भी कंपनी बाहर का रास्ता दिखा देती है शायद अब में बूड़ा हों रहा हूं इसलिए इस फील्ड में जल्दी थक जाता हूं लेकिन आगे मुझे कोई और रास्ता भी तो दिखाईं नहीं देता है क्या करूं क्या ना करूं मन ही से सवाल जवाब कर रहे थे।

मोबाइल निकाल कर उन्होंने तीन चार दोस्तों को भाई नौकरी चली गई है कहीं दूसरी जगह बताइए ना तब किसी ने अभी कंपनी में जगह नहीं है और किसी ने में भी दो महीने से घर पर बैठा हूं तीसरे ने तुम्हारी उम्र हो गई है इस फील्ड में काम करने के लिए मेहनत चाहिए ।

चोथे ने भाईसाहब पता है हर साल लाखों लड़के लड़कियां सिविल इंजीनियर कि डिग्री लेकर कालेज से आते है फिर कम तनख्वाह में भी काम करने के लिए तैयार हो जाते हैं ऐसे में हमारे तुम्हारे जैसे अनुभवी आदमी को भी ज्यादा तनख्वाह को देखकर कंपनी कोई भी बहाना करके बाहर निकाल देती है में तो कहता हूं कि अपना खुद का धंधा करना चाहिए चाहें वह सब्जी विक्रेता बनने का हों।

हां हां भाई आप ठीक कहते हैं खुद का व्यापार करना ही होगा महेन्द्र ने हां मिलाते हुए कहा था।

महेंद्र जैसे ही घर पहुंचे थें उनका उतरा हुआ चेहरा पत्नी बच्चों ने देख कर समझ लिया था कि नौकरी नहीं है बच्चों ने कहा था पापा आप बिल्कुल चिंता मत करना हम दोनों भाई बहन ने कोचिंग सेंटर खोल लिया है कालेज से आते ही हम बच्चों को ट्यूशन पढ़ाएंगे हम अपना कालेज का खर्चा खुद उठा लेंगे  ।

पत्नी ने कोई बात नहीं नौकरी गई ना जाने दिजिए हम सब्जी बेचने का घर से ही काम करेंगे और आप कि नौकरी से ज्यादा कमाएंगे अब चलिए हाथ मुंह धोकर खाना खाइए ।

बेटी ने पापा आप का कहानी लिखने का बहुत मन करता था ना तब मैंने आप के लिए वेवसाइट ब्लागर पर तैयार कर दी है आप कि बेटी साफ्टवेयर इंजीनियर कि पढ़ाई कर रही है वह शिक्षा कब काम देगी बस अब आपको मोबाइल पर ही लिखना है देखना ऐक दिन आप का नाम सारे संसार में रोशन होंगा आप बहुत बड़े लेखक बनेंगे।

बेटा ने चहकते हुए कहा था पता है पापा सात समुंदर पार के लोग भी कहानी पढ़ते हैं और आप कि वेवसाइट आप को सोते समय भी डालर में पैसा देगी बस आप सब चिंता छोड़कर अपना समय लेखन कला में दिजिए ।

सभी ने मिलकर एक साथ अब टेंशन हमारी है पापा को नौकरी कि टेंशन से मुक्त करतें हैं ।

बहुत जल्दी महेन्द्र कि कहानियां ब्लागर पर फेमस हो गई थी साहित्य जगत में बड़े बड़े लेखक उस का नाम जाननें लगें थे ।


सीख प्राइवेट नौकरी ऐक उम्र के बाद करना बहुत मुश्किल है ऐसे में उम्रदराज आदमी अंदर से टूट जाता है बिखर जाता है वह भूल जाता है कि नौकरी के अलावा भी बहुत काम है भगवान ने सभी के अंदर कुछ ना कुछ कला दी है अपनी उस कला पर काम करना चाहिए परिवार साथ है।
परिवार का एकजुट होना यह कहानी सिखाती है कि मुश्किल समय का हम हंसते हुए निकाल सकते हैं।

अगर यह कहानी आप को अच्छी लगी तब  तब कमेंट करके बताइए।

ज्ञान की पांच बातें उज्जैनी के राजकुमार कि कहानी 
https://www.worldstorys.com/2026/10/blog-post_16.html आप पढ़िएगा 









 

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