कॉलोनी के सभी बंगलों में साफ सफाई का काम चल रहा था कुछ बंगले मालिक फिर से पेंट करवा रहे थे तब कुछ बगीचे के पेड़ पौधे कि कांट छांट करवा रहे थे तब कुछ छतों पर सोलर पैनल लगवा रहे थे तब कुछ पुराना फर्नीचर कबाड़ वाले को बेचकर नया बाजार से खरीद कर ला रहे थे भाई साहब सब पैसे वाले थें ।
ऐसा लगता था कि बड़े बड़े सेठों के बीच प्रतिस्पर्धा चल रही थी कि अगर तुम्हारे पास पैसा है तब मेरे पास भी है कुछ सेठों ने तों ऐक महीने पहले से ही आर्किटेक्ट और ठेकेदारों को नियुक्त कर दिया था और उन्हें सख्ती से आदेश दिया गया था कि धनतेरस से ऐक दिन पहले कंप्लीट करना होगा पैसा भले ही ज्यादा लगेगा चलेगा।
यह सब तैयारी दीपावली के लिए हों रही थी ।
कल्ला कॉलोनी का चकीदार था कॉलोनाइजर ने जब कालोनी काटी थी उस समय से था पहला बंगला भी उसके सामने तैनात हुआ था और आख़री भी वह बात अलग है कि कल्ला कि झोपड़ी दस साल में धीरे धीरे खिसकती हुईं सरकारी नाले के पास पहुंच गयी थी ना तो कल्ला ने कॉलोनी छोड़ी थी और ना ही कॉलोनी वालों ने कल्ला को छोड़ा था।
सेठों के और कल्ला के बीच अद्भुत प्रेम था उन्हें कोई भी काम कठिन लगता तब कल्ला को फोन कर के किधर है तूं जल्दी आ देख तुझे वह करना है तब कल्ला जी बाबूजी अभी आया कुछ देर बाद हाजिर हों जाता था ।
वह बात अलग थी कि कल्ला कि कोई फिक्स तनख्वाह थी सेठ लोग काम कराने के बाद सौ दो रूपए उसे दे देते थे तब वह उन पैसों को माथे से लगाकर जेब में रख लेता था ऐसा ही उसका जीवन निकल रहा था हमेशा उसके चेहरे पर संतोष का भाव रहता था
कल्ला बड़े सेठ का काम निपटा कर झोपड़ी पर पहुंच गया था किसी ने आ गये लगता है कि आज बहुत मेहनत का काम था कमजोर आवाज से कहां था ।
हां सेठ जी का फर्नीचर बहुत भारी था कमर दुखने लगी है अच्छा पहले में तुझे चाय बना दू फिर खाना पकाने कि तैयारी करूं ।
कमजोर आवाज वाली उसकी धर्म पत्नी थी लकवा ग्रस्त होने के कारण आधा धड़ बेजान था कहते हैं कि जब कल्ला कि शादी हुई थी उसके ऐक साल बाद धर्म पत्नी लकवा ग्रस्त हो गई थी ऐसे में कल्ला को बाहर के काम करने के साथ घर का सब काम करना पड़ता था जो वह निर्विकार भाव से हंसते हुए.... करता था।
धनतेरस का दिन था सुबह से ही कल्ला व्यस्त था कभी कोने वाले सेठ का फोन आता तब कभी बीच बाले सेठ का कोई कहता कल्ला जल्दी बाजार से फूल माला लेकर आ तब कोई कहता अरे मैं बाज़ार से नयी झाड़ू लाना भूल गया जलदी जा तब कोई सेठ उस दुकान पर जाकर पटाखे ले आ मैंने दुकान वाले को फोन लगा दिया है जी बाबूजी अभी आया ।
कल्ला कि साइकिल का पहिया थम नहीं रहा था लेकिन उसे घरवाली कि चिंता सता रही थी हालांकि सुबह ही भोजन पका कर उसे खिला दिया था और चार पाई के पास पानी और दोपहर का खाना रख कर आया था निर्मोही सेठों ने ऐक बार भी नहीं पूछा था कि कल्ला तेरी घरवाली कैसी है देख मेरी और से फल और मिठाई ले जाकर उसे खिला देना यह दुनिया बहुत मतलबी है गरीब आदमी से सिर्फ काम से ही सेठ साहूकार मतलब रखते हैं उनकी दुनिया में भावनाओं का कोई स्थान नहीं वह मन ही मन सोच रहा था।
सभी का काम खत्म करके कुछ फल मिठाई मिट्टी का दीपक लेकर वह झोपड़ी पर पहुंच गया था कमली ने आ गये आप संध्या हो गई है और देखो बंगलों कि रंग-बिरंगी रोशनी झोपड़ी के अंदर तक आ रही है अच्छा आज धनतेरस है भगवान धनवंतरी कि पूजा भी करना है लेकिन हमारे पास तो धन हैं ।
कमली ने लम्बी सांस भरते हुए कहा मैं कभी भी आप को सुख नहीं दे पाई सारे जीवन आप से सेवा कराई है भगवान ने ना जाने किस जन्मों के पापों कि सज़ा दी है उसके आंखों से अश्रु धारा बहने लगी थी ।
कितनी अभागी हूं मैं भगवान ऐसा किसी के साथ मत करना एसे जीवन से तों मर जाना अच्छा है लेकिन में मर भी तो नहीं सकतीं क्योंकि में ..... क्यों कि में वह रोने लगी थी।
कल्ला ने कहा था कि देख कमली भगवान् ने हमारी ऊपर से ही जोड़ी बनाई थी तेरी जगह अगर में लकवा ग्रस्त हो जाता तब तूं क्या करती क्या मुझे छोड़कर भाग जाती क्या अग्नि देव के सामने सात फेरे लिए थे उस बंधन को भूल जाती तब क्या सात पांच बचन निभाने का हमने बादा किया था दुःख सुख में साथ रहने का उसे भूल जाती।
पगली मुझे मालूम है तूं कभी नहीं भूलतीं अरे यह जीवन हैं भगवान जैसा हमें जीने दे भगवान कि मर्जी मानकर खुश रहना चाहिए।
माना कि जीवन में धन जरूरी है निर्धन को कोई नहीं पूछता लेकिन मेरे लिए सबसे बड़ा धन तूं हैं जब तक में जिंदा हूं अपने धन कि तन मन से रक्षा करूंगा मेरे जीते जी तुम्हें रोने का अधिकार नहीं है समझी अच्छा में हाथ मुंह धोकर तैयार होता हूं फिर हम मिलकर पूजा करेंगे ।
कॉलोनी दुल्हन जैसी सजी हुई थी रंग बिरंगी रोशनी आसमान से भी दिखाईं दें रही थी बंगलों के अंदर बाहर दीपक कि लो जल रही थी पटाखे फोड़े जा रहें थें उन पटाखे का धुआं आसमान में बादल जैसा छा रहा था चारों तरफ जोरदार धमाका ही सुनाई दे रहा था ।
झोपड़ी के अंदर और बाहर मिट्टी का दीपक कि लो जल रही थी कल्ला और कल्ली दोनों ने खुश होकर धनतेरस कि पूजा कि थी ।
सीख पति-पत्नी का रिश्ता जन्मों जन्मों का होता है कहते हैं शरीर का आधा अंग ऐक दूसरे के पास होता है अगर कोई अंग बीमार हो जाए तब उस का उपचार करते हैं उसे त्यागते नहीं है।

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