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गुप्त मंत्र Gupt Mantra emotional story

 मध्य रात्रि का दूसरा पहर था आसमान में बादल छाए हुए थे और कभी तेज़ तों कभी रिमझिम बारिश कर रहे थे दूर कहीं आसमान में बिजली चमक रहीं थी उसके चमकने के कुछ सेकंड बाद भीषण गर्जन करने लगे थे ऐसा लगता था कि किसी पेड़ पर या फिर देवालय पर बिजली गिर गई थी अब गर्जन थमने के बाद कुत्तों को भी आपस में संवाद करने का मौका मिल गया था तभी तो गांव के सभी गली के कुर्ते भोंक भोंक कर ऐक दूसरे का हालचाल पूछ रहे थे कि सब कुशल मंगल तों है ना सभी भाई-बंधु सुरक्षित है ना? एसे ही मौसम में बूढ़े आदमी ने पत्नी से सुनतीं हों जरा मुझे पानी पिला देना तकलीफ के कारण उसके मुंह से ठीक-ठाक शब्द भी नहीं निकल पा रहे थे । बुढ़िया   खटिया पर से उठ कर  पानी पिलाया था फिर आज तुम्हारी तबियत ज्यादा ख़राब है में बेटों को जगातीं हूं और अभी गांव के डाक्टर के पास लें जाने का कहतीं हू‌  चिंतित होते हुए उन्होंने कहा था। बूढ़े आदमी कि सांस तेज चल रही थी पेट में पानी जाने के बाद कुछ पलों के लिए आराम मिला था तभी तो उसने कहा था बेटों को जगाने से कोई फायदा नहीं होने वाला ऐसा लगता है कि अब धरती पर हमारा समय पूरा होने ...

दीपावली त्यौहार से सीखने वाली पांच सकारात्मक बातें कहानी


 दीनदयाल जी लिविंग रूम में अखबार पढ़ रहे थें तभी चिंकी ने प्रश्न किया था दादा जी दादी घर कि साफ सफ़ाई क्यों कर रही है ।

बेटा क्यों कि दीपावली दीपक जलानें का त्योहार आ रहा है दीनदयाल जी ने उत्तर दिया था 

दीपावली क्या होती है दादा जी।

दीपावली बेटा अंधकार पर प्रकाश बुराई पर अच्छाई कि  अज्ञान पर ज्ञान की  जीत का प्रतीक है  पुराणों के अनुसार भगवान राम 14 बरस वनवास खत्म होते ही अयोध्या घर वापस आए थे तब नगर वासियों ने मिट्टी के दीपक जलाकर उनका स्वागत किया था।

सात वर्षीय चिंकी कुछ छण गाल पर उंगली रख कर सोचने लगी थी उसकी बाल जिज्ञासा बढ़ने लगी थी तभी उसने फिर प्रश्न किया था 

 दादा जी हमें दीपावली के त्योहार से क्या सीखना चाहिए ??

दीनदयाल जी ने अखबार को सोफे पर ऐक और रख दिया था फिर चश्मा उतार कर आंखों पर हाथ फेरते हुए उन्होंने उत्तर में कहा था कि बेटा पांच सकारात्मक बातें हैं जिन्हें हमें जीवन में उतारना चाहिए।

क्या बातें हैं दादा जी प्लीज़ बताओ ना बताओ ना।

ठीक है पहली बात जैसे कि आप ने कहा कि दादी घर कि साफ सफाई क्यों कर रही है तब बेटा साफ साफ सुथरी जगह पर बैक्टीरिया छोटे छोटे कीड़े सब भाग जाते हैं  चूंकि गन्दी जगह पर मच्छर ज्यादा रहते हैं और वही मच्छर जब हमें काटते हैं तब हम बीमार हो जाते हैं फिर हमें डाक्टर जी के पास जाना होता है और ढेर सारा पैसा खर्च होता है।

दीनदयाल जी हाथों से ढेर को बताया था।

दूसरी बात क्या है दादा जी चिंकी ने प्रश्न किया था।

अभी बेटा तेरे पहले सबाल का पूरा उत्तर नहीं दिया है  देख हमें घर जैसा साफ स्वच्छ मन को रखना चाहिए किसी के बारे में गलत ख्याल नहीं आना चाहिए जब मन साफ सुथरा रहेगा तब वह हमें सही सलाह देगा ।

सलाह क्या होती है दादा जी चिंकी ने प्रश्न किया था।

देख बेटा तेरी दादी तुझे बार बार टोकती है कि बेटा मोबाइल फोन पर ज्यादा रील नहीं देखना चाहिए ज्यादा गेम नहीं खेलना चाहिए क्योंकि इस से हमारा समय खराब होता है पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए जब तूं अच्छा पड़ेगी तब बहुत बड़ी अफ़सर बनेंगी तेरा जीवन सफल हो जाएगा यही सलाह देती है ना दादी ।

हां हां दादा जी फिर मन भी क्या 

बेटा मन ही तो हमारा सच्चा दोस्त हैं मन और अंतरात्मा दोनों ही आपस में बात करते रहते हैं फिर हमें सच्ची सलाह देते हैं उस सलाह को मानना चाहिए।

चिंकी को तन मन दो बातें का उत्तर मिल गया था उसने चहकते हुए फिर पूछा तीसरी बात क्या है दादा जी।

दीनदयाल जी ने पानी पीने के बाद बेटा दीपावली को हम लछ्मी माता कि पूजा करते हैं लछ्मी जी धन कि देबी है जीवन में धन बहुत जरूरी है इसलिए हमें स्वच्छ तन मन के साथ धन कि भी आवश्यकता होती है धन कमाने के लिए मेहनत करना पड़ती है फिर पैसा आता है उस पैसा का कुछ भाग हमें आगे भविष्य के लिए बचाकर रखना चाहिए और कभी भी पैसा का दुरूपयोग नहीं करना चाहिए। 

चिंकी को तीन बातें समझ में आ गई थी फिर उसने चौथीबत क्या है बताइए ना।

बेटा जैसे कि हम मिट्टी का दीपक जलाते हैं मिट्टी प्रकृति की पतीक है और प्रकृति क्या है जैसे जल जंगल जमीन पहाड़ नदी तालाब यह सब प्रकृति है इस मे हम पशु पंछी सब मिलकर रहते हैं हमें पेड़ पौधे नहीं काटना चाहिए पेड़ हमें शीतल छांव देते हैं और हमें साफ सुथरी हवा जिसे हम ऑक्सीजन कहते हैं दूसरा पेड़ पौधे ही पानी बरसाते हैं  वही पानी हम पीते हैं ।

दीपक कि लो का मतलब हमारा जीवन हमेशा उज्वल चमकता हुआ रहना चाहिए हमारी चमक परिवार समाज को  दिखाई देना चाहिए।

पांचवीं बात बताइए ना दादा जी ।

बेटा जैसे कि हम पटाखे फोड़ते हैं  उस का धुआं आसमान में जाता है जिससे हमारा प्रदूषण खराब होता है हमारी हवा ख़राब हो जाती है और वह हवा हमारे फेफड़ों के लिए अच्छी नहीं है  इसलिए हमें कम पटाखे फोडना चाहिए और उन पटाखे का कचरा तुरंत साफ कर के डस्टबिन में डालना चाहिए ।

चूंकि यह प्रकाश का त्यौहार है ऐसे में हमें फूलझडिया जलाकर प़काश करना चाहिए लेकिन उन्हें भी घर से बाहर निकल कर क्यों कि उनसे से कही भी आग लग सकती है जिससे हमारा नुकसान होता है ।

अच्छा समझ गई दादा जी चिंकी ने कहा था।

अब बेटा अंतिम बात दीपक हमेशा मिट्टी के ही उपयोग करना चाहिए इससे हमें दो लाभ देखने को मिलते हैं जो गरीब कुम्हार दीपक बनाकर बेचता है उस के पास आता है उस पैसे उसका घर खर्च चलता है बच्चों के लिए कपड़े व स्कूल कि कापी किताबें खरीद लेता है ।

चूंकि दीपक मिट्टी का है तब वह दीपक वापिस मिट्टी में मिल जाता है जिससे हमारी मिट्टी कि गुणवत्ता खराब नहीं होती है कुछ लोग आर्टिफिशियल मतलब ऐसे प्लास्टिक के दीपकों का उपयोग करते हैं जिन्हें मिट्टी में मिलने के लिए दस बीस साल लगते हैं इसलिए हमेशा हमें मिट्टी के दीपक जलाकर प़काश का पर्व मनाना चाहिए।

दीनदयाल जी ने चिंकी को पांच सकारात्मक बातें समझा दी थी ऊसकी बाल जिज्ञासा शांत हो गई थी।

सीख  जीवन में हमें इन पांच सकारात्मक बातों का 


 

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