गर्मी कि तपती दोपहर थी लूं के थपेड़े गालों पर तमाचा जैसे लग रहे थे कान से बाहर गर्मी निकल रही थी ऐसे ही मौसम में अमित सड़क निर्माण के लिए लेवल मशीन पर रोड का स्लोप चेक कर रहा था ठेकेदार के पीछे पीछे गार्डर लगाते जा रहें थें ।
उस सुपरवाइजर कि बात पूरी भी नहीं हुई थी तभी प्रोजेक्ट मैनेजर का फोन आया था अमित मैंने कंक्रीट का आर्डर कर दिया है नो इंट्री दस बजे रात्रि को खत्म हो जाएगी उसके बाद टी एम आना चालू हों जाएंगे रेडी मिक्स कंक्रीट ट्रक को टी एम कहते हैं और सुनो क्लाइंट का इंजीनियर पांच बजे फाइनल चेक करने के लिए आएगा बहुत कड़क हैं पांच एम एम तक नहीं छूट देता ध्यान रखना वरना
चेतावनी देते हुए उसने फोन कट कर दिया था अमित ने गमछे से पसीना पोंछते हुए सुपरवाइजर से भाई आज लंच कैंसल करता हूं पांच बजे के पहले कंप्लीट करना है ।
ठीक है साहेब आप पानी पी लिजिए ठंडा हैं उसने पानी कि बोतल पकड़ाते हुए कहा था।
पांच बजे प्रोजेक्ट मैनेजर क्लाइंट के इंजीनियर के साथ आ गया था लेवल मशीन लेवल सीट टेप से चेक किया था कही कहीं बीस एम एम कि गलतियां स्लोप और रोड कि चौड़ाई में पकड़ में आ गई थी क्लाइंट के इंजीनियर ने पूर कार्ड पर हस्ताक्षर करने में आनाकानी कि थी ।
अमित क्या देखतो हों ध्यान किधर रहता है अगली बार कोई ग़लती पकड़ में आएगी बाहर कर दूंगा समझें प्रोजेक्ट मैनेजर जोर जोर से चिल्लाए जा रहा था शायद क्लाइंट का इंजीनियर यहीं चाहता था सिगरेट सुलगाते हुए उसने पूर कार्ड पर हस्ताक्षर कर दिए थे ।
अमित तुम्हारी नाईट ड्यूटी है रोड कि कंक्रीट कि भराई तुम कराओ और सुनो कोई ग़लती नही होना चाहिए ।
साहेब मैंने आज लंच भी नहीं किया गर्मी में काम किया थक गया हूं आप किसी दूसरे को ....... अमित ने डरते डरते कहा था
नहीं ड्यूटी तुम्हें ही करना होंगी और सुनो हर गाड़ी कि फोटो कितना कयूविक मीटर किस गाड़ी में आया गुरूप में डालना होगा में सुबह कोई बहाना नहीं सुनने वाला समझें ?
अमित कि आंखों कि कोर से आंसू कि बूंद धीरे से पसीना के साथ ऐक हों गई थी महानगर कि नौकरी उसने खुद ही चुनी थी वह अतीत में चला गया था ।
अहमदाबाद से हजार किलोमीटर दूर मध्यप्रदेश के छोटे से जिला के छोटे से गांव का रहने वाला था माता पिता का लाडला था घर में खेती किसानी भी थी गाय भैंस भी थी खुद का मकान भी था ।
इतना सबकुछ होने के बाद उसे महानगर कि नौकरी का भूत सवार था या यूं समझें महानगर कि ऊंची ऊंची इमारतों कि चकाचौंध पसंद थी तभी तो वह माया जाल में उलझ गया था इतनी मेहनत करने के साथ उसे कुछ ही हजार रुपए मिलते थें उनमें से पी जी का किराया होटल पर खाने में आधे खर्च हों जाते थे।
उसे याद आया था कि पिता जी तीन भैंस और पांच गायों का दूध घी बेचकर हजारों रूपए घर से ही कमा लेते हैं और सकून कि नींद लेते हैं पिताजी ने कितना समझाया था ।
अमित तेरे पास खेती-बाड़ी सब कुछ है दो बीघा ज़मीन पर सब्जी कि खेती-बाड़ी करेगा तब महानगर कि नौकरी से ज्यादा पैसा मिलेगा मत जा बेटा मत जा मेरे लाल मां ने भी रोते हुए उसे रोका था लेकिन उसे तो महानगर कि भीड़ पसंद थी लेकिन ऐसा संघर्ष करना होगा सोचा भी नहीं था।
सुबह सूर्योदय हो गया था कंक्रीट कि गाड़ियां आना बंद हो गई थी रोड पर फ्लोटर चल रहे थे फिनिशिंग टच का काम जारी था नींद में अमित कि आंखें बंद हो रही थी फिर भी वह फिनिशिंग के हर पार्ट पर नजर रखे हुए था नो बजे प्रोजेक्ट मैनेजर आ गया था ।
कैसी फिनिशिंग हुईं है गुरूप लाइन में नहीं है कहां दिमाग रहता है तुम्हारा कितना समझाया था कि कोई ग़लती नही मिलना चाहिए तनख्वाह हराम कि ले रहे हों।
प्रोजेक्ट मैनेजर कि कठोर बातों से अमित कि आत्मा घायल हो गई थी तुनककर ज़बाब में कहा था ।
ऐसा लगता है कि आप ने मुझे खरीद लिया तभी तो दिन रात काम करवाने के बाद भी खरी खोटी सुनाते हों भाड़ में गई तुम्हारी नौकरी मुझे अभी हिसाब चाहिए समझें मिस्टर क्या समझ रखा है कि अमित नंगा भूखा है अरे मेरे पास खेती-बाड़ी सब कुछ है तुम्हारे जैसों को नोकरी पर रख लूं ग़लती मेरी है जो कि खुद के खेतों में मेहनत नहीं करना चाहता था ।
शाम कि रेलगाड़ी से अमित घर वापस आ गया था माता पिता खुश हो गए थे उसने अब कभी महानगर कि नौकरी के लिए नहीं जाऊंगा पता हैं मां लाखों कि भीड़ में में हमेशा अकेला रहा कोई अपना नहीं मिला था ।
मां तेरी बहुत याद आती थी अब कभी आप दोनों को छोड़कर नहीं जाऊंगा आप के साथ रहने पर कितना सुख मिलता है पता है मां वह प्रोजेक्ट मैनेजर बहुत डांटता था दिन रात काम करवाता था मैंने भी उससे बोल दिया था कि तेरे जैसे नोकर अपने खेतों के लिए रख लूंगा अब खेतों में मेहनत करूंगा और जीवन के सभी सपने इन्हीं खेतों से पूरे होंगे
सीख गांव कि खेती-बाड़ी छोड़कर युवा महानगर कि और रूख कर रहे हैं उन्हें कुछ हजार रुपए कि नौकरी भी मिल जातीं हैं लेकिन उन हजारों रूपए के लिए कितना संघर्ष मेहनत करना पड़ती है ।
जो अमित ने कि थी इससे अच्छा महानगर को छोड़कर युवा वर्ग को वापस गांव कि और वापस आना चाहिए उनके खेत खलिहान गाय भैंस सभी खुलें दिल से स्वागत करने के लिए बैठें हुए हैं अच्छा महानगर में आप ने कितना संघर्ष किया है सच सच कमेंट करके बताइए।
यह कहानी आप को कैसी लगी ?
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| महानगर कि नौकरी का मायाजाल |

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