काव्या सुबह का नाश्ता तैयार कर रही थी पास ही मोबाइल रखा हुआ था बीप कि आवाज सुनकर देखा था शोशल मिडिया पर किसी ने दोस्त बनने का नोटिफिकेशन भेजा था परांठे सेंकते हुए उन्होंने उसकी प्रोफ़ाइल पर नजर डाली थी ।
जी अभी आई
फटाफट दो आलू पराठें के साथ टमाटर कि चटनी तैयार कि थी पति को मुस्कुराते हुए जरा सा भी आप को सवर नहीं है चलिए नाश्ता किजिए में लंच बॉक्स लगाती हूं ।
काव्या पड़ी लिखीं सुंदर थी उसकी शादी को अभी दो साल ही हुए थे पति-पत्नी में बहुत प्यार था अभी कोई भी बच्चा नहीं था चूंकि पति दिन भर आफिस में रहता था ऐसे में अकेले समय काटना मुश्किल काम था ।
इसलिए वह शोशल मिडिया पर एक्टिव रहती थी रील बनाना और देखना कमेंट करना उसे अच्छा लगता था हालांकि उसने नौकरी करने के लिए अप्लाई किया था बैंक मैनेजर के पद पर सिलेक्शन भी हो गया था लेकिन उसे दूर दराज का शहर मिला था इ चूंकि सुभाष भी अच्छा खासा कमाते थे इसलिए वह नौकरी ठुकरा दी थी ।
घर का जरूरी काम निपटा कर उसने वह प्रोफाइल देखी थी रिक्वेस्ट एक्सेप्ट कर के हाय कैसे मुझे जानते हैं आप
दूसरी तरफ से नमस्कार आप कि रील देखता हूं पुराने गीतों के साथ आप का डांस करने का तालमेल बहुत सुंदर है
काव्या :- तारीफ करने के लिए शुक्रिया
एक बार बात हुई यह बात मैसेंजर पर रोज होने लगी थी वह लड़का जिसका नाम हिमालय था उससे चेट करना अच्छा लगने लगा था बातों बातों में ऐक दूसरे का मोबाइल नंबर ले लिया था अब दिन में विडीयो काल पर लम्बी लम्बी बातचीत होने लगी थी ।
लेकिन वह सावधान थी उसने उस लड़के को अपना दूसरा नम्बर दिया था जिसमें सिर्फ मैसेज विडीयो काल कि ही सुविधा थी बात करतीं थी सभी डीलिट कर देती थी और पति के घर आने के समय पर बंद कर देती थी उस नम्बर का पासवर्ड अलग था ।
सुभाष का विश्वास और प्रेम काव्या के लिए भरपूर था उनकी और से आजादी थी समय निकाल कर दोनों ही हिल स्टेशन पर घूमने निकल जाते थे दोनों ही अपनी लाइफ में खुश थें लेकिन काव्या का मन उस लड़के से मिलने का होने लगा था उसने मन-ही-मन इस विषय पर विचार किया था अंतर आत्मा कहती काव्या तू भटक रही है ।
तेरा पति सुंदर है हट्टा कट्टा नौजवान हैं अच्छा कमाता है और तुझे जो चाहिए भरपूर देता है फिर क्यों तूं ही कभी कभी थककर चूर हो कर अरे बाबा अब रहने दिजिए मुझसे नहीं होगा कहने लगती है ऐसा प्यार करने वाला प्यारे पति को धोखा देने का सोच रहीं हैं।
छी छी तेरी सोच पर घिन आती है तूं उस सिम कार्ड को तोड़कर हमेशा हमेशा के लिए बात करना खत्म कर दें नहीं तो देखना तेरा घर बहुत जल्दी उजड़ जायेगा ।
आत्मा मन सबसे अच्छे दोस्त हैं मन हमेशा हमारा भला चाहते हैं लेकिन हम मन कि सलाह पर महत्व नहीं देते हैं यही काव्या का हाल था उस लड़के कि लच्छेदार बातों में वह पूरी तरह से फस गयी थी ।
मेरी जान अब रहा नहीं जाता प्लीज मुझे ऐक बार मौका दिजिए आप को पहली मुलाकात हमेशा याद रहेंगी
देखिए में शादीशुदा हूं और अपने पति से बहुत प्यार करती हूं में ऐसा कभी सोच भी नहीं सकती हमारी बात चीत हैं और हम बात चीत में शब्दों कि मर्यादा भी पार कर गये है यही तक ठीक है काव्या ने कहा था
नहीं नहीं मुझे आप से मिलना हैं विश्वास करना यह मुलाकात हमारे आपके बीच रहेंगी जीतें जी किसी को भनक नहीं लगेंगी कसम खा कर कहता हूं प्लीज प्लीज मेरे ऊपर दया करना होंगी
काव्या ने कुछ देर सोचा था फिर लेकिन हम मिलेंगे कहां
देखिए में ऐक सी का काम करता हूं आप पतिदेव से ऐ सी कि सर्विस करवाना है बोल देना
ठीक है लेकिन सिर्फ एक बार
जी पक्का बादा करता हूं ।
शाम को जैसे ही सुभाष घर पहुंचे थे एक सी में ठंडक कम हैं में स सर्विसग करवाना होगी ।
भाई मना किसने किया आप को आप का घर है सुभाष ने मुस्कुराते हुए कहा
तब ठीक है मेरी परचित का मिस्त्री हैं जो ऐ सी का काम करता है कल बुला लेती हूं लेकिन
लेकिन क्या
में घर में अकेली रहूंगी ऐसा किजिए कल आप भी रूक जाना
जी नहीं मुझे कल बहुत काम है सुभाष ने कहा था
दूसरे दिन सुभाष के आंफिस जाने के बाद काव्या ने उस लड़के को घर बुला लिया था फिर वह हुआ था जिसे समाज स्वीकार नहीं करता जिस रिश्ते को गन्दी नजर से देखा जाता है ।
लेकिन काव्या बहुत खुश थी उसे कुछ अलग हटकर सुख मिला था कुछ पलों के लिए गहरी समाधि में लीन हो गयी थी खुश होकर आप तो छुपे हुए रूस्तम निकले अब हम हमेशा मिलेंगे लेकिन सावधानी के साथ समझें जनाब ।
पाप कभी छुपता नही है सिर पर बैठकर बुद्धी हर लेता है यही काव्या के साथ हुआ था सुभाष का जब भी मन उससे प्यार करने का होता था तब वह ना नुकर कर के पास नहीं आने देती थी सुभाष प्यार से कोई बात नहीं आप कि तबियत तो ठीक है कुछ कमजोरी समझ में आ रही है तबडाक्टर को चेक अप करा लेते हैं ।
नही नही ऐसा नहीं में बिल्कुल ठीक हूं
फिर यह बेरूखी क्यों काव्या
ऐक दिन फाइल सुभाष घर से लाना भूल गए थे आफिस से घर आ गए थे डोर बैल बजाने के बाद काव्या ने दरवाजा खोला था अस्त-व्यस्त कपड़े बिखरे हुए बाल और चेहरे का उड़ा हुआ रंग देखकर सब कुछ समझ में आ गया था बेडरूम में वह लड़का था।
उन्होंने काव्या में उन आदमीयों में से नहीं हूं जो घरेलू हिंसा करते हैं आप इस लड़के के साथ खुश हैं मेरी लिए बहुत खुशी कि बात हैं में तुम्हें तलाक देता हूं और उम्मीद करता हूं कि आप इस से जल्दी ही व्याह करके सुखी जीवन व्यतीत करें हमारा तुम्हारा साथ बस इतने ही दिन का था ठीक हैं ।
चूंकि वह लड़का पहले से ही शादीशुदा था शादी के लिए मना कर दिया था अब काव्या न घर कि थी ना ही घाट कि पछताने के अलावा उसके पास कुछ नहीं बचा था।
चूंकि यह शोशल मिडिया का जमाना है हम दिन का अनमोल समय मनोरंजन के लिए शोशल मिडिया को देते हैं ठीक है हमें अच्छे बुरे दोस्त बनने का या बनाने के नोटिफिकेशन आते हैं ऐसे में हमें बहुत सोच-समझकर निर्णय लेना चाहिए किसी भी कीमत पर परिवारिक रिश्ते का भरोसा नहीं टूटने देना चाहिए खासकर पति-पत्नी का जो ऐक नाजुक धागे में पिरोकर बंधा रहता है यह कहानी आप को कैसी लगी कमेंट करके बताइए।

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