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गुप्त मंत्र Gupt Mantra emotional story

 मध्य रात्रि का दूसरा पहर था आसमान में बादल छाए हुए थे और कभी तेज़ तों कभी रिमझिम बारिश कर रहे थे दूर कहीं आसमान में बिजली चमक रहीं थी उसके चमकने के कुछ सेकंड बाद भीषण गर्जन करने लगे थे ऐसा लगता था कि किसी पेड़ पर या फिर देवालय पर बिजली गिर गई थी अब गर्जन थमने के बाद कुत्तों को भी आपस में संवाद करने का मौका मिल गया था तभी तो गांव के सभी गली के कुर्ते भोंक भोंक कर ऐक दूसरे का हालचाल पूछ रहे थे कि सब कुशल मंगल तों है ना सभी भाई-बंधु सुरक्षित है ना? एसे ही मौसम में बूढ़े आदमी ने पत्नी से सुनतीं हों जरा मुझे पानी पिला देना तकलीफ के कारण उसके मुंह से ठीक-ठाक शब्द भी नहीं निकल पा रहे थे । बुढ़िया   खटिया पर से उठ कर  पानी पिलाया था फिर आज तुम्हारी तबियत ज्यादा ख़राब है में बेटों को जगातीं हूं और अभी गांव के डाक्टर के पास लें जाने का कहतीं हू‌  चिंतित होते हुए उन्होंने कहा था। बूढ़े आदमी कि सांस तेज चल रही थी पेट में पानी जाने के बाद कुछ पलों के लिए आराम मिला था तभी तो उसने कहा था बेटों को जगाने से कोई फायदा नहीं होने वाला ऐसा लगता है कि अब धरती पर हमारा समय पूरा होने ...

तर्पण कहानी


 देश में हर महीने कोई ना कोई त्यौहार आ जाता है लेकिन यह त्योहार  अलग हटकर है क्योंकि इस त्योहार में कौवा को खाना खिलाना पड़ता है वह भी पूर्ण श्रद्धा भक्ति भाव से कहते हैं।

 कि पूर्वज कौवे के रूप में आते हैं भरपेट भोजन करने के बाद आर्शीवाद देकर जाते है ऐसी मान्यता है पुराणों में भी उल्लेख मिलता है हजारों सालों से बहते पानी में चावल कुशा के साथ पूर्वजों को पानी पिलाते हैं कुछ लोग भारत देश के गया जी में पूजन करवातें है अब कहानी पर आता हूं ।

श्याम लाल से पड़ोसी युवक ने पूछा भैया मिठाई के लड्डू कितने बनवाना है हलवाई पूछ रहा है ।

हजार मेहमानों को भोजन करवाना है उससे चार हजार नग का कह देना ‌।

थोड़ी देर बाद दूसरे आदमी ने पूछा भैया सब्जी कौन कौन सी बनवाना है ।

मटर पनीर चूंकि बाबूजी को बहुत पसंद थी उसके साथ आलू टमाटर छोले भटूरे सलाद रायता  श्याम लाल ने बताया था 
कुछ देर बाद नाई ने भैया सिर का मुंडन संस्कार करवा दिजिए मुझे और जगह भी जाना है ।

श्याम लाल नाइ के साथ घर के पीछे जाकर मुंडन के लिए बैठ गये थे मुंडन आधा भी नहीं हुआ था तभी पत्नी दुलारी आ खड़ी हुई थी घूंघट के अन्दर से ही पत्तल दोना और पूजा कि सामाग्री नहीं है पंडित जी आते ही होंगे ।

श्याम लाल ने कुर्ते कि जेब में हाथ डाल कर कुछ रूपए निकाले थें दीना से कह कि बाजार जाकर जल्दी सभी सामग्री लें आए और पंडित जी का पर्चा अलमारी में रखा हैं उससे कहना कि ध्यान से पड़कर सामान लाना ।

भैया बाबूजी भले मानुष थे आप के दरवाजे पर गरीब आदमी भी आया उसको भी सम्मान दिया सभी का भला किया बहुत पुन्य आत्मा थें नाई  उस्तरा चलाते हुए बोला  था।

हां भैया  बात खत्म भी नहीं हुई थी तभी टेंट वाला आ गया था चांदनी कितने फिट लगवाना है बता दिजिएगा जल्दी क्यों कि लड़कों को दुसरी बुकिंग पर जाना है ।
श्याम लाल के सिर पर नाइ बेंसन का लेप करने लगा था नीचे गर्दन किए हुए वे सभी को काम बता रहे थे तभी वातावरण में भीनी भीनी खुशबू समां गयी थी  शायद मिठाई की थी उधर मेहमान आने लगें थें फूफा ने आकर श्याम लाल से आदेश पूर्वक कहां था श्राद्ध करने में कोई कमी नहीं रहना चाहिए मेरे साले साहब का ही पैसा तेरे पास हैं समझ गया ना 

जी फूफा जी 

सब्जी मिठाइयां तैयार हो गई थी पूडीया सेकी जा रही थी फूफाजी सभी सामग्री का बारीकी से निरीक्षण कर रहे थे ।

श्याम लाल पत्नी के साथ पूजा में बैठे हुए थे पंडित जी बहुत सारे मंत्रों को पड़ रहें थे साथ ही उन का अर्थ भी समझा रहे थे जैसे कि पूर्वज अभी आस पास बैठ कर सब कुछ सुन रहे हैं सब देख रहें और जो नदी में पानी देते हैं उस पानी से उनकी प्यास बुझती है आदि  ।

पुजा खत्म होने के बाद पंडित जी अपने हाथ से पत्तल पर भोजन सजाया था जो कि कौवा के लिए था छत पर बिधी विधान से रखा गया था इस बीच भोजन तैयार हो गया था चूंकि मेहमानों को शाम पांच बजे से रात्रि बारह बजे तक का समय दिया गया था उसी समय अनुसार मेहमान आने लगें थें ।

घर के बाहर जमीन पर फट्टी बिछाकर बैठने कि व्यवस्था कि गयी थी पानी पीने के लिए ट्रैक्टर टैंकर खड़ा कराया गया था दोना पत्तल उठाने का ठेका दिया गया था गांव के युवाओं ने भोजन परोसने का काम अपने हाथों में ले लिया था ।

कहते हैं घर में कोई उत्सव हों और शांती से खत्म हो यह तो अतिशयोक्ति होंगी जीजा जी कुछ रिश्ते दारो के साथ शराब पी कर आ गये थे श्याम लाल तूने जीतें जी बाप को खिलाया नहीं और आज हजारों आदमी को खाना खिलाकर अपना पाप धौना चाहता है  हां हां हां यह कलयुग है यहां जो जैसा करता है उसे यही पर ब्याज सहित वापस करना पड़ता है हां हां हां 

जीजा जी बड़बड़ा रहें थे इसी बीच फूफाजी से रहा नहीं गया था उन्होंने भी तुनककर कहां श्याम लाल जमाई ठीक कह रहे हैं तुमने और तुम्हारी औरत ने बाबूजी को भरपेट भोजन नहीं दिया सब मालूम है बेचारे भूखे प्यासे ही संसार से चलें गये ।

पुरूषों के बीच वाक्युद्ध चल रहा था ऐसे में महिलाएं पीछे रहें हो नहीं सकता दुलारी ने घूंघट हटाकर हाथ मटाकर रिश्ते दार हों समझें फालतू बात नहीं करना 

बुआ और दीदी भी मुकाबला करने के लिए मैदान में आ गई थी हां हा जितना तेरा हक है उतना ही हमारा अभी खड़े खड़े संपत्ति का बटवारा करवा लूंगी ।

दुलारी :- अब समझ में आया कि तुम सबको संपत्ति से मतलब है फूटी कौड़ी भी नहीं मिलेंगी आई हों तब इज्जत से रहना वरना 
दीदी :- वरना क्या देख रहा है श्याम लाल तेरी औरत कि जुवान कितनी चल रही है तूने मेरे भाई को बस में कर लिया ठीक है पूरा घर अस्त-व्यस्त कर दिया वह तों भला हो भगवान का कि मां तेरे व्याह से पहले चल बसी तेरे खसम को मैंने ही पाल पोस कर बड़ा किया कलमुंही सब भूल गयी 

घर के बाहर मेहमान चटकारे लेकर भोजन डकार रहे थे और सब्जी में नमक कम मिठाई में शक्कर ज्यादा है कमी निकाल रहें थे और अंदर गृह युद्ध चल रहा था दोनों तरफ के योद्धा ज़बान से अपने अपने हथियारों का प्रयोग कर रहे थे ।

कहते हैं यह कलयुग है यह युग पैसा का है अभी के समय में रिश्ते नातों का कोई मतलब नहीं  

फूफा को एकाएक ख्याल आया दोडकर छत पर पहुंच गए थे दोना पत्तल पर भोजन ऐसी ही रखा था ऐक और कौवा बैठा हुआ कांव कांव कर रहा था उसे देख कर जल्दी जल्दी सीढ़ीयां उतरकर श्याम लाल दुलारी जमाई सभी जल्दी छत पर चलिए देखो बाबूजी आ गये है सभी मिलकर उन्हें मनाएंगे वह भोजन नहीं कर रहे हैं ।

पूरा परिवार छत पर बाबूजी बाबूजी गलतियां माफ किजिए और भोजन कर के आर्शीवाद दिजिएगा ।

श्याम लाल बाबूजी यह सच है कि हम दोनों ने आप को अंतिम कुछ दिनों के लिए भूखा रखा गलती मेरी नहीं है दुलारी की भी है यहीं कहतीं थी कि भूखे पेट रहेंगे तब विस्तर खराब नहीं करेंगे मुझ से मल मूत्र साफ नहीं होंगा हां हां बाबूजी ग़लती इसी की थी ।

दुलारी बाबूजी आप ने मुझे बेटी माना मान सम्मान प्यार दिया लेकिन आप के विस्तर से मल मूत्र कि बदबू आ रही थी मेरी नाक सहन नहीं कर पाई थी में भूल गए थी  ।

कि एक समय हमें भी बूढ़ा होना है हमें भी विस्तर पर मल-मूत्र त्याग करना है आज  हम पति-पत्नी दिखावे  करने के लिए हजारों आदमीयों को भोजन करा रहा हैं और आप के जीते जी आप को भूखा रखा बाबूजी हमें छमा करना दोनों पति-पत्नी फूट-फूटकर रो रहें थे।

में किसी भी तीज त्योहारों का विरोधी नहीं हूं मैं इस कहानी के माध्यम से समाज को संदेश देना चाहता हूं कि परिवारिक रिश्ते के मूल्यों का इमानदारी से निर्वाह करना चाहिए बूढ़े मां-बाप के मल-मूत्र को साफ सफाई रखनी चाहिए क्योंकि कि जन्म लेने के कुछ साल तक हमारे माता-पिता ही हमारे मल-मूत्र कि सफ़ाई करते हैं कहानी कैसी लगी कमेंट करके बताइए।





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