दो भाई थे ऐक का नाम रोशन लाल और दूसरे का नाम धर्म दास था दोनों का ही अपना अपना व्यापार था घर भी अलग-अलग थें हालांकि ऐक ही शहर में रहते थे लेकिन उनका मिलना जुलना कभी कभार ही होता था ।
बड़े भाई रोशन लाल का कपड़े का व्यापार था कपड़ा बाजार में बहुत बड़ी दुकान थी लाखों रूपए का कपड़ा बिकता था और छोटे भाई का मेडिकल स्टोर था जिसमें कुछ ही हजार रुपए कि आय होती थी ।
धनवान का घंमडी होना आम बात है ऐसे में रोशन लाल अपनी अकड़ में रहते थें अपने व्यापार और परिवार में ही मस्त रहते थे छोटे भाई कि कम आमदनी का उपहास उड़ाते थे कहते थें तूने जीवन में किया ही क्या जीवन में पैसा बहुत जरूरी है पैसा से ही गाड़ी बंगला खरीदें जाते हैं मुझे देख मेरे पास महंगी महंगी कारें और बंगला हैं और तूं अभी भी पुरानी खटारा मोटरसाइकिल से ही चलता है।
छोटा भाई सिर झुकाकर कहता भैया मेरे पास जितना है में उन पैसों से अपने परिवार का बेहतर खयाल रख रहा हूं बच्चों को अच्छी शिक्षा दिला रहा हूं में सुखी हूं अब भला ज्यादा पैसा का में क्या करूंगा।
और पैसा तो हाथ का मैल है आता जाता रहता है असली धन तो मन कि शांति है किस्मत वालों को ही मिलती है ।
समय का पहिया अपनी रफ़्तार से बढ़ रहा था मानव इतिहास में सदी कि सबसे बडी महामारी कोरोनावायरस ने सारे विश्व में हाहाकार मचा दिया था बहुत से लोगों ने अपने परिवार के सदस्यों को खोया था रोशन लाल कि धर्मपत्नी भी इस महामारी कि भेंट चढ़ गई थी ऐसे में संसार के समर में वह अकेले ही बचें हुए थें ।
बेटा ऐक था जो सात समुंदर पार अमेरिका कि कंपनी में साफ्टवेयर इंजीनियर था उसने वही सहकर्मी लड़की से विवाह कर लिया था ।
पत्नी के गुजरने के बाद रोशन लाल जी कि दिमागी हालत खराब हो गई थी वह निराशा के गहरे गड्ढे में चलें गये थे जीवन अंधकारमय लगने लगा था ऐसे में निर्णय लेने कि छमता कम हों गई थी बाजार के उतार चढ़ाव पर ध्यान नहीं दिया गया था ।
देखते ही व्यापार ठप्प हो गया था रोशन लाल जी कर्ज में डूब गए थें उन कर्जदारों से छुटकारा पाने के लिए कार बंगला सब कुछ बेचना पड़ा था शहर का जाना माना रहिश कंगाल हो गया था।
समय बहुत बलवान है कब किसे धनवान बना दें और कब कंगाल यह तो समय ही जानता है रोशन लाल जी दर दर कि ठोकरें खा रहे थे बड़े भाई कि ऐसी दशा देखकर धर्म दास से रहा नहीं गया था ऐक दिन उन्हें खोजते हुए उनके पास पहुंच गए थें ।
भैया घर चलिए आप कि बहूं बच्चे आप के लिए बहुत चिंतित हैं आप का इंतजार कर रहे हैं हम सब आप के है बुरे समय पर अपने ही काम आते है छोटे भाई के सामने रोशन लाल जी आंख मिलाकर बात करने से बचना चाहते थे उन्हें वह सब याद आ रहा था ।
जब बातों बातों में ताने दिया करते थे और आज वहीं छोटा भाई सबकुछ भूलकर घर ले जाने के लिए आया था आंखों में अश्रुपूर्ण होकर उन्होंने कहा तेरे साथ सारे जीवन बुरा सलूक किया मुझे माफ करना।
आपकों मुझसे माफी मांगने कि कोई जरुरत नहीं है आप बड़े है चलिए जो बीत गया उसे याद नहीं करना चाहिए बस आप अब घर चलिए।
रोशन लाल जी के घर पहुंचने पर बहू ने भाईसाहब आप हमारे अपने हैं और अपने परेशानी में हों तब हमें सुखी रहने का कोई अधिकार नहीं है देखिए बच्चे भी आप को देखकर कितने खुश हैं व्यापार में नुकसान ही तो हुआ हैं हम मिलकर फिर से कपड़े का व्यापार करेंगे आप के पास अनुभव है उसी अनुभव से आप का शहर में फिर से नाम होंगा ।
निराशा त्याग दिजिए भैया आप अकेले नहीं हैं ठीक हैं बेटा सहयोग करने के लिए तैयार नहीं है में हूं ंना धर्मदास ने ढांढस बंधाया था ।
फिर से व्यापार चालू किया गया था रोशन लाल जी का अनुभव और धर्मदास कि मेहनत से कार बंगला सब कुछ वापस आ गया था ।
सीख आजकल भाई ऐक दूसरे से दूर हों रहें हैं विपरीत परिस्थितियों में सहयोग नहीं करते हैं धन संपत्ति के लिए झगड़ते हैं कोर्ट कचहरी का चक्कर लगाते हैं जो गलत है
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| ऐसा भाई जो व्यापार में घाटा होने के बाद बड़े भाई का सहारा बनता है |

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