प्राचीन समय कि बात थी ऐक नगर था जिसका नाम उज्जैनी था वहां का राजा तीर्थ यात्रा पर गया था जानें से पहले राज्य के सभी अधिकार राजकुमार को दे दिए थे राजकुमार बहुत दयालु था जो भी याचक राज दरबार में आता था सब को खुश होकर वापस जाते थे ।
ऐक दिन गरीब ब्राह्मण दरवार में आया था चूंकि उसे धन कि जरूरत थी बेटी का व्याह करना था राजकुमार ने पंडित का तथा उचित सत्कार करके कैसे आना हुआ आप कि क्या सहायता कर सकता हूं कृपया मुझे अवगत कराएं।
ब्राह्मण ने कहा हे राजन् मुझे अपनी बेटी का व्याह करना है मेरे पास अन्न धन नहीं है में आप के पास इसीलिए आया हूं ।
हां हां क्यों नहीं में अभी राजकोष से आप को धन देता हूं राजकुमार ने कहा था।
हे राजन् में कभी मुफ्त में धन नहीं लेता अपनी और से उसके बराबर देकर लेता हूं हे में तुम्हें पांच ज्ञान कि बातें कागज पर लिखकर दे रहा हूं इन बातों को अकेले में ही पड़ना होगा और याद रखना होगा यह बातें सारे जीवन भर काम आएगी।
पंडित जी ने कागज निकाल कर दीया था जिसमें लिखा था ।
ममता कि मां दोलत का पिता
बनी कि बहिन संकट का मित्र गाठी के दाम
आंखों के सामने जवान पत्नी
जो जागें सो पावें जो सोवे सो खोवे बरना बात करत मर जाए तब कोई बात नहीं।
राजकुमार ने कागज को रख लिया था ब्राह्मण को धन देकर विदा कर दिया था ।
कुछ दिन बाद राजा तीर्थ यात्रा से वापस लौट आए थें उन्होंने राजकोष का हिसाब देखा था बहुत सारा धन कम मिला था खजांची से पूछताछ की तब उसने बढ़ा चढ़ाकर राजा से
हे राजन् राजकुमार ने मेरे मना करने पर भी गरीब भीख मांगने वाले को अन्न वस्त्र धन दिया अच्छा रहा आप जल्दी वापस आ गए हैं कुछ दिन बाद आप को पूरा खजाना खाली मिलता।
राजा क्रोध से कांपने लगे थे राजकुमार को बुला कर मेरे राज्य कि सीमा से अभी बाहर जाना होगा यहीं तुम्हारी सजा हैं और राजसी वस्त्र धन सब यही छोड़कर जाना पड़ेगा मेरा आदेश हैं।
राजकुमार ने पिता कि आज्ञा का पालन करना अपना कर्तव्य समझा था राजसी वस्त्र उतारते हुए उन्होंने पंडित जी का कागज पड़ा था दोलत का पिता ममता कि मां मतलब पिता को औलाद से ज्यादा संपत्ति प्यारी है बात सच निकली थी अब वह मां के पास पहुंच कर मां पिता जी ने मुझे राज्य से बाहर रहने का आदेश दिया है में आप से आर्शीवाद लेने के लिए आया हूं ।
मां का रो रो कर बुरा हाल था चुपचाप उन्होंने कुछ धन मतलब सोने कि अशरफिया राजकुमार को दे दी थी और कहा था बेटा इस धन को गाठी में बांधकर रखना बुरे समय पर काम आएगा।
राजकुमार ने ममता कि मां अर्थात मां को अपनी संतान से ज्यादा प्रेम रहता है संपत्ति से नहीं सच दूसरी बात निकली थी।
राजकुमार जंगल में अकेला भूखा प्यासा चलता रहा उसे बहिन कि याद आईं थी बहिन के राज्य कि सीमा पास ही थी चूंकि बहिन उस राज्य कि रानी थी नगर के बाहर ऐक पेड़ के नीचे राजकुमार बैठ गया था राहगीरों से बहिन बहनोई को खबर भेजी थी बहिन को पहले ही पता लग गया था कि पिता जी ने भाई को राज्य से बाहर निकाल दिया है दिन रात इंतजार करने के बाद बहिन मिलने नहीं आई थी मतलब पंडित जी का बनी कि बहिन धन कि बहिन सच निकली थी ।
राजकुमार फिर आगे चलता हुआ मित्र के राज्य कि सीमा पर पहुंच गया था सीमा पर राज्य के सैनिक तैनात थें राजकुमार ने कहा कि जाकर अपने राजा से कहना कि उज्जैनी का राजकुमार आया है जो फटें हुए कपड़े पहनकर आया है ।
मित्र ने जैसे ही यह संदेश सुना तुरंत राजसी ठाट-बाट लेकिर सीमा पर पहुंच गया था राजकुमार को राजसी वस्त्र पहनाए गए थे हाथी पर सवार होकर राजमहल पहुंचे थे पंडित जी कि यह बात भी सच निकली थी कि संकट का मित्र मतलब सच्ची मित्रता के बीच धन का कोई महत्व नहीं है।
मित्र के राज्य में कुछ दिन रहने के बाद राजकुमार ने कहा था कि अब मुझे चलना चाहिए तब मित्र ने आप यही रहेंगे में अपना आधा राज्य आप को देता हूं ।
राजकुमार ने विनम्र भाव से दोस्त के प्रस्तावक टाल दिया था फिर वह आगे कि यात्रा पर चला गया था चलते चलते वह अपनी ससुराल पहुंच गया था भूख से व्याकुल था ऐक बाग में ठहर गया था गाठी के दाम मतलब मां ने जो सोने कि अशरफिया दी थी उसमें से माली को देकर पेट कि भूख शांत कि थी।
सहसा राजकुमार को आंखों के सामने कि तिरिया यानी पत्नी यह पंडित जी कि बात याद आ गई थी वह भेष बदलकर आधी रात को महल के दरवाजे के सामने अंधेरे में छुप गया था कुछ देर बाद उसकी पत्नी 16 श्रृंगार करके कहीं जा रही थी राजकुमार भी पीछे पीछे चलता रहा बाहर नगर के कोतवाल का निवास स्थान था ।
वह कोतवाल के पास पहुंच गयी थी दोनों ही प्रेम करने लगे थे सहसा रानी ने मुझे पान खाना हैं अभी आप को बुलाना पड़ेगा।
कोतवाल ने घर के बाहर निकल कर देखा था राजकुमार चबूतरे पर पागल जैसा बैठा था कोतवाल ने कड़क लहज़े से सुन मीना बाजार से तुझे अभी पान लाना है और ध्यान रखना पान में कत्था ज्यादा नहीं होना चाहिए समझें।
राजकुमार पान लेकर आ गया उसकी पत्नी यानी कोतवाल कि प्रेमका ने पान में कत्था ज्यादा है ऐसा कहते हुए थूक दिया था कोतवाल ने क्रोधित होकर राजकुमार की पीठ पर कोड़े मारें थें ।
पंडित जी कि यह बात भी सच निकली थी अब वह और आगे कि यात्रा पर चला गया था चलते चलते दूसरे राज्य में पहुंच गया था वहां भी वह बाग में ठहर गया था देखता है कि राजा के सैनिकों लड़के को पकड़ कर ले जा रहे थे कारण पूछा था तब सैनिकों ने बताया था कि राजकुमारी के शयनकक्ष में पहरा देना पड़ता है और जो भी पहरा देता है सुबह मृत मिलता है राज्य के बहुत सारे युवा धीरे धीरे खत्म हो रहें हैं ।
राजकुमार ने विनम्र भाव से में आज रात पहरा दूंगा इसे छोड़ दिजिए ।
राजकुमारी शयनकक्ष में नींद लें रहीं थी और राजकुमार तलवार के साथ पहरा दे रहा था उसे नींद आ रही थी तभी पंडित जी कि बात याद आई थी कागज़ पर लिखा था जो जागें सो पावें बरना अर्थात जागना होगा तभी इस रहस्य को समझ पाऊंगा उसने उंगली पर तलवार से जख्म कर लिया था ताकि दर्द हो और नींद ना आए।
आधी रात के बाद राजकुमारी के पलंग के अन्दर से नागिन निकली थी जो धीरे-धीरे उसे डसने के लिए आ रही थी राजकुमार ने तलवार से उस नागिन को मार डाला था सुबह वह राजा को जिंदा मिला था राजा उसकी सूझबूझ से खुश हो गया था और राजकुमारी के साथ व्याह कर दिया था ।
कुछ महीने रहने के बाद राजकुमार ने राजा से कहा था में अपने राज्य वापस जाना चाहता हूं ।
ठीक है राजकुमार रानी के साथ था साथ में सेना हाथी घोड़ा पालकी धन सब कुछ था चलते चलते वह पहली ससुराल पहुंच गया था पहली रानी को लेकर दोस्त के पास गया था दोस्त का जैसा पहले व्योहार था वही मिला था।
बहिन को जब पता चला कि भाई दो भाभी के साथ राजसी ठाट-बाट से आ रहा है वह हाय मेरे भैया कहते हुए लिपटकर भावुक हो गईं थी मतलब बनी कि बहिन धन आने के साथ बहिन का नजरिया बदल गया था कुछ दिन रहकर वह अपने राज्य कि सीमा पर पहुंच गया था।
पिता जी राजा साहब को जैसे ही पता चला कि राजकुमार ने दूसरा विवाह विंध्य प्रदेश कि राजकुमारी के साथ कर लिया साथ में धन भी बहुत आया है स्वागत करने के लिए सीमा पर खुद पहुंच गए थे मतलब दोलत का पिता पंडित जी कि यह बात भी सच निकली थी।
मां का पुत्र वियोग में रो रो रो कर बुरा हाल था आंखों कि रोशनी चली गई थी पुत्र की सकुशल वापसी पर खुश हो कर खुशी के आंसू बहाने लगी थी ममता कि मां यह बात सच हुई थी।
राजकुमार दोनों रानियों के साथ अमोद प्रमोद में मस्त था मजाक मजाक में कोतवाल पान सुपारी कत्था बता दिया था जैसे ही पहली रानी ने यह सब सुना था सदमे में उसके प्राण पखेरू उड़ गए थे मतलब जो जागें सो पावें जो सोवे सो खोवे बरना बात सुनकर ही मर जाए कोई बुरा नहीं ।
सीख ज्ञानवर्धक पाच बातों का सामना हमें जीवन में करना पड़ता है इन सब बातों का महत्व समझकर जीवन में उतारना चाहिए।

Good
ReplyDeleteआप का बहुत बहुत आभारी हूं कि आप ने अपना कीमती समय निकाल यह कहानी पढ़ी कृपया कोई भाषा या कोई भी कमी है तब मुझे बताइए।
ReplyDeleteBahut badiya
ReplyDeleteBadiya likha hai aapne
ReplyDeleteधन्यवाद आपका
ReplyDeleteबहुत अच्छी स्टोरी है बहुत बढ़िया👈🏻
ReplyDeleteकहानी कि भाषा शैली में कोई भटकाव है तब मुझे बताइए आप ने अपना कीमती समय देकर कहानी पडी आप का बहुत बहुत धन्यवाद
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