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गुप्त मंत्र Gupt Mantra emotional story

 मध्य रात्रि का दूसरा पहर था आसमान में बादल छाए हुए थे और कभी तेज़ तों कभी रिमझिम बारिश कर रहे थे दूर कहीं आसमान में बिजली चमक रहीं थी उसके चमकने के कुछ सेकंड बाद भीषण गर्जन करने लगे थे ऐसा लगता था कि किसी पेड़ पर या फिर देवालय पर बिजली गिर गई थी अब गर्जन थमने के बाद कुत्तों को भी आपस में संवाद करने का मौका मिल गया था तभी तो गांव के सभी गली के कुर्ते भोंक भोंक कर ऐक दूसरे का हालचाल पूछ रहे थे कि सब कुशल मंगल तों है ना सभी भाई-बंधु सुरक्षित है ना? एसे ही मौसम में बूढ़े आदमी ने पत्नी से सुनतीं हों जरा मुझे पानी पिला देना तकलीफ के कारण उसके मुंह से ठीक-ठाक शब्द भी नहीं निकल पा रहे थे । बुढ़िया   खटिया पर से उठ कर  पानी पिलाया था फिर आज तुम्हारी तबियत ज्यादा ख़राब है में बेटों को जगातीं हूं और अभी गांव के डाक्टर के पास लें जाने का कहतीं हू‌  चिंतित होते हुए उन्होंने कहा था। बूढ़े आदमी कि सांस तेज चल रही थी पेट में पानी जाने के बाद कुछ पलों के लिए आराम मिला था तभी तो उसने कहा था बेटों को जगाने से कोई फायदा नहीं होने वाला ऐसा लगता है कि अब धरती पर हमारा समय पूरा होने ...

सात रोटी और भूतनी किस्सा


मेरे बचपन कि बात है रोज शाम को दादी मुझे किस्सा सुनाया करती थीं उस समय टेलीविजन मोबाइल थें ही नहीं तब हम सभी भाई बहन दादी किस्सा सुधारों ना ज़िद करने लगते थे ।

फिर दादी के पिटारे से किस्से निकलने लगते थे बस हम भाई बहनों में से किसी को हूका मतलब हां कहना पड़ता था कैसे दिन थे वह काश फिर से बचपन में पहुंच जाऊं और दादी भी दूसरी दुनिया से वापस आ कर फिर किस्सा सुनाने लगे तब खैर यह संभव नहीं है चलिए किस्सा बताते हैं।

शायद मेरी उम्र सात साल रही होगी उन्होंने मुझे सात रोटी गरीब चरवाहा और भूतनी कि सुनाई थी में आप सभी को शब्दों में लिखकर बता रहा हूं।

बहुत समय पुरानी बात है ऐक गांव था उस गांव में गरीब चरवाहा रहता था जिसका नाम श्याम था उसके पास दस बारह भेड़ें थी जिन्हें वह जंगल में चराने ले जाता था उन्हीं भेड़ों से उसका घर खर्च चलता था परिवार में सिर्फ मां ही थी ऐक दिन मां ने उसे सात सूखी रोटी पोटली में बांध कर दी थी ।

और कहा था कि बेटा आज जब तुझे भूख लगे तब ऐक खाऊं कि दो खाऊं कि तीन खाऊं कि सारी खा जाऊं ऐसा कहते हुए रोटी खाना।

श्याम मां का आज्ञाकारी था भेड़ें लेकर वह जंगल में पहुंच गया था दोपहर हो गई थी भूख भी लग आई थी लेकिन पीने के लिए पानी नहीं था थोड़ी और दूर जानें के बाद उसे बावड़ी दिखाई दी थी मिट्टी के घड़े में पानी लाकर वह बावड़ी कि सीढ़ीयां पर बैठ गया था जैसा कि मां का आदेश धा ।

उसने रोटी पोटली में से निकाल कर एक खाऊं कि दो खाऊं कि तीन खाऊं कि सारी खा जाऊं कहा था बस उसके ऐसे कहनें से ही बावड़ी के अंदर से भूतनी निकल आई थी उसने कहा था कि देखो हमें मत खाना हम सात बहिन इसी बावड़ी में रहते हैं मेरे ऊपर दया करना में तुम्हें बदलें में ऐक कटोरी देती हूं जिसमें तुम्हारी इच्छा करने से ही भोजन तुम्हारी पसंद का आ जाएगा ।

श्याम ने भूतनी कि बात मान ली थी बदलें में भूतनी ने अक्षय पात्र बड़ा सा कटोरा जैसा वर्तन दिया था श्याम ने मुझे मिठाई खाना है ऐसा कहते हुए मिठाई आ गयी थी ।
मां के शब्दों को याद कर के श्याम ने फिर से कहा था ऐक खाऊं कि दो खाऊं कि सारी खा जाऊं रोटीयां से कहा था।

दूसरी बार ऐसा कहते ही दूसरी भूतनी प्रकट हो गई थी उसने कहा था कि अभी जो आइ थी वह मेरी छोटी बहन थी और मैं उससे बड़ी देखो मुझे मत खाओ में तुम्हें पारस पत्थर देती हूं वह पत्थर तुम्हें रोज सो सोने कि अशरफिया देगा श्याम ने उसकी बात मान ली थी पारस पत्थर लेने के बाद उसने मुझे अभी सो सोने कि असर्फी चाहिए कहा था पलक झपकते ही असर्फी आ गई थी ।

श्याम को फिर मां के शब्दों कि याद आ गई थी उसने फिर से रोटीयां कि पोटली खोलकर ऐक खाऊं कि दो खाऊं कि तीन खाऊं कि सारी कि सारी खा जाऊं कहा था ।

उसके ऐसा कहते ही तीसरी भूतनी प्रकट हो गई थी उसने कहा था देखो अभी जो दो आइ थी मेरी छोटी बहिनें थी मुझे मत खाना बदलें में तुम्हें जांदू कि बांसुरी दूंगी जिसे बजाकर तुम किसी भी राजा कि सेना को अपने बस में कर सकते हों श्याम ने कहा ठीक है मैं तुम्हें नहीं खाऊंगा बांसुरी ले ली थी।

अभी भी श्याम सीढ़ी पर बैठा हुआ था उसके पास जो अक्षय पात्र 
था उसने मन पसंद भोजन किया फिर पानी पीकर लम्बी डकार ली थी उसने सोचा कि क्यों न फिर से रोटी कि पोटली खोलकर फिर से ऐक खाऊं कि दो खाऊं कि सारी खा जाऊं कहना चाहिए मां का यही तो आदेश था।

ऐक खाऊं कि दो खाऊं कि सारी खा जाऊं जैसे ही उसने कहा था चोथी भूतनी प्रकट हो गई थी देखो मुझे मत खाना में तुम्हें अजेय तलवार दूंगी उस तलवार कि चमक से ही दुश्मन भाग जाएंगे श्याम ने ठीक है में तुम्हें नहीं खाऊंगा मुझे तलवार चाहिए।

उसने तलवार ले ली थी अब फिर से ऐक खाऊं कि दो खाऊं कि सारी खा जाऊं कहा था पांचवीं भूतनी प्रकट हो गई थी देखो मुझे मत खाना में तुम्हें उड़न खटोला दूंगी जिस पर बैठ कर आसमान के रास्ते से कही भी आ जा सकते हों श्याम ने कहा ठीक है उड़न खटोला के लिए उस भूतनी ने कपड़ा नुमा गलीचा दिया था ।

अब थोडी देर सोचने के बाद श्याम ने फिर से कहा था कि ऐक खाऊं कि दो खाऊं कि सब खा जाऊं ऐसा कहते ही छठवीं भूतनी प्रकट हो गई थी उसने कहा था कि देखिए मुझे मत खाना में तुम्हें जांदू का घोड़ा दूंगी जिस पर बैठ कर पलक झपकते ही कही भी जा सकते हों श्याम के पास घोड़ा आ गया था ।

ऐक बार फिर से उसने कहा था कि ऐक खाऊं कि दो खाऊं कि सारी रोटियां खा जाऊं ऐसा कहते ही सातवीं भूतनी प्रकट हो गई थी उसने कहा था देखिए मुझे मत खाना में तुम्हें ऐक मंत्र देती हूं जिसे पढ़ने पर कोई भी बड़ा जादूगर तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता ।

 और हां हम सब कि बहिन कि मां को जादूगर ने क़ैद कर लिया है अगर तुम उस जादूगर से मेरी मां को मुक्त करा दोगे तब तुम्हारी शादी सबसे छोटी बहिन से करा दूंगी  हम सब बहिनें ऐक राजा कि संतान हैं और मेरी मां बहुत बड़े राज्य कि रानी थी जो बहुत ही सुन्दर थी ।

वह जादूगर मेरी मां कि सुंदरता पर मोहित हो गया था इसलिए उसने मेरी मां को कैद करके जांदू के महल में छुपा कर रखा हुआ है और हम सब बहिनें को उसने भूत बना दिया था हम सभी डरकर इस बावड़ी में रहने लगे थे ।

श्याम ने अच्छा ऐसा है तब हमें अभी उस जादूगर के पास चलकर मां को क़ैद से आज़ाद करवाना है बड़ी बहिन श्याम के साथ उड़न खटोला पर बैठ कर रास्ता दिखा रही थी कुछ देर बाद वह जादूगर के जांदू के महल पर पहुंच गए थे बड़ी भूतनी ने सब कुछ समझा दिया फिर वह डरकर छुप गयी थी ।

श्याम और जादूगर का घनघोर युद्ध हुआ था चूंकि श्याम के पास जांदू कि बांसुरी छड़ी तलवार घोड़ा उड़न खटोला के साथ मंत्र भी था जिससे वह युद्ध जीत गया था सातो भूतनी कि मां को क़ैद से आज़ाद कर लिया था और उस जादूगर को क़ैद कर लिया था अब सभी बहिनें मनुष्य देह में वापस आ गयी थी श्याम का छोटी बहन से व्याह हों गया था।

श्याम पत्नी मां के साथ सुख पूर्वक जीवन व्यतीत कर रहा था चूंकि उसके पास पारस पत्थर था जिससे उसे रोज सोने कि अशरफिया मिलतीं थी देखते देखते झोपड़ी से महल बन गया था अब उसके चर्चे दूर दूर तक होने लगें थें आसपास के गांवों में कोई भी उससे बड़ा धनवान नहीं था लोगों को आश्चर्य था कि इस ग़रीब चरवाहा के पास धन कहां से आया था ।

कुछ लोगों ने राजा से शिकायत दर्ज कर दी थी राजा ने तुरंत ही सेनापति को आदेश दिया था कि अभी श्याम को क़ैद कर के मेरे सामने हाजिर करना होगा सेनापति सेना के साथ श्याम को क़ैद करने के लिए पहुंच गया था ।

श्याम अकेला था और राजा कि सेना हजारों में थी श्याम जांदू के घोड़े पर बैठकर जांदू कि तलवार से युद्ध कर रहा था बीच बीच में जांदू कि बांसुरी बजा कर सेना को बस में कर रहा था कुछ ही समय में श्याम युद्ध जीत गया था जैसे ही राजा को युद्ध हारने का समाचार मिला था वह चुपचाप डर कर परिवार सहित दूसरे राज्य में भाग गया था अब श्याम राजा बन गया था ।

आप से सवाल क्या आप कि दादी या दादा जी ने बचपन में किस्सा सुनाया था कृपया कमेंट करके बताइए ।
लेखक का नाम महेन्द्र सिंह 





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