Skip to main content

गुप्त मंत्र Gupt Mantra emotional story

 मध्य रात्रि का दूसरा पहर था आसमान में बादल छाए हुए थे और कभी तेज़ तों कभी रिमझिम बारिश कर रहे थे दूर कहीं आसमान में बिजली चमक रहीं थी उसके चमकने के कुछ सेकंड बाद भीषण गर्जन करने लगे थे ऐसा लगता था कि किसी पेड़ पर या फिर देवालय पर बिजली गिर गई थी अब गर्जन थमने के बाद कुत्तों को भी आपस में संवाद करने का मौका मिल गया था तभी तो गांव के सभी गली के कुर्ते भोंक भोंक कर ऐक दूसरे का हालचाल पूछ रहे थे कि सब कुशल मंगल तों है ना सभी भाई-बंधु सुरक्षित है ना? एसे ही मौसम में बूढ़े आदमी ने पत्नी से सुनतीं हों जरा मुझे पानी पिला देना तकलीफ के कारण उसके मुंह से ठीक-ठाक शब्द भी नहीं निकल पा रहे थे । बुढ़िया   खटिया पर से उठ कर  पानी पिलाया था फिर आज तुम्हारी तबियत ज्यादा ख़राब है में बेटों को जगातीं हूं और अभी गांव के डाक्टर के पास लें जाने का कहतीं हू‌  चिंतित होते हुए उन्होंने कहा था। बूढ़े आदमी कि सांस तेज चल रही थी पेट में पानी जाने के बाद कुछ पलों के लिए आराम मिला था तभी तो उसने कहा था बेटों को जगाने से कोई फायदा नहीं होने वाला ऐसा लगता है कि अब धरती पर हमारा समय पूरा होने ...

समय कि पोटली भावुक कहानी


 शाम का समय था राम नाथ जी बहुमंजिला इमारत के पन्द्रह माले कि बालकनी में बैठे हुए चाय कि चुस्कियां ले रहे थे नीचे गाड़ियां का शोर सुनाई दे रहा और उपर आसमान में पंछी झुंड के साथ अपने अपने घोंसले में लोट रही थें उन पंछी झुंड कि चहचहाट कि आवाज मधुर धुन जैसी सुनाई दे रही थी लेकिन फ्लेट में अजीब सा सन्नाटा पसरा हुआ था ।

अंदर अविनाश स्वाति जो बेटा बहू थें लेपटॉप पर  कुछ काम कर रहे थे रामनाथ जी अविनाश के पास जाकर खड़े हो गए थें उन कि आहट सुनकर अविनाश ने नीचे गर्दन किए हुए कहा पापा कुछ चाहिए आप को  ?

नहीं नहीं बेटा आज रविवार है तेरा छुट्टी का दिन है में चाहता हूं कि स्वाति और तूं मेरे साथ कुछ समय व्यतीत करें बहुत सारी बातें करने का मन हो रहा है।

पापा  चूंकि कल प्रोजेक्ट सम्मिलित करना है उसे ही देख रहा था कि कहीं कोई ग़लती तो नहीं है और हां गलतियां मिल भी रही है आप प्लीज़ मुझे अभी डिस्टर्ब न करें अविनाश ने नीचे गर्दन करते हुए कहा था ।

राम नाथ जी के पास पैसा था पेंशन भी मिल रहीं थी नौकर चाकर भी थें महंगी महंगी कारें भी थी लेकिन पत्नी के स्वर्ग वास होने के बाद वह अकेले पड़ गए थें कोरोनावायरस के समय पत्नी का देहांत हो गया था कोई बात करने वाला नहीं था ऐसे में अखबार या टेलीविजन पर अपना समय निकालते थे ।

ऐक दिन रामनाथ जी मखमली पोटली लेकर अविनाश के पास खड़े हो गए थे अविनाश ने कहा था कुछ चाहिए पापा आप बताइए अभी आनलाइन मंगवा देता हूं ।

स्वाति ने कहा इसमें क्या है पापा कोई पुश्तैनी जेवर गहने शायद आप मुझे गिफ्ट करना चाहते हैं हैं ना ?

नहीं जरूर पैसा होंगा आप कोई प्रॉपर्टी खरीदना चाहते हैं ना अविनाश ने चहकते हुए कहा था।

मेरी सबसे बड़ी प्रॉपर्टी तो तुम दोनों हों पर अफसोस  रामनाथ जी ने प्रश्नवाचक चिन्ह लगाकर वाक्य अधूरा ही छोड़ दिया था।

दोनों को देखकर उन्होंने पोटली खोली थी जिसके अंदर से कागज के पेन से लिखे हुए टुकड़े निकलें थें स्वाति ने उन्हें पड़ा था दस मिनट समय कि कीमत इतने रूपए बीस मिनट के समय कि कीमत और ज्यादा  और संडे को बाहर घूमने जाने कि कीमत बहुत ज्यादा थीं।

अविनाश ने यह क्या है समय कीमत समझा नहीं ?

बेटा तुम दोनों के पास मेरे लिए समय नहीं है में तुमसे तुम्हारा समय खरीदना चाहता हूं मेरे पास पैसे कि कमी नहीं है क्या तुम लोगों को कीमत कम लग रही है और बढ़ाएं हालांकि मैंने कल कुछ जमीन बेचकर तुम दोनों के एकाउंट में पैसा ट्रांसफर कर दिया है ।

तेरी मां के जाने के बाद में एकदम अकेला हो गया हूं मुझे यह खामोश फ्लेट बहुत खलता है कहने के लिए हम तीनों इस फ्लेट में रहते हैं लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि सेंकड़ों किलोमीटर हम दूर दूर रहते हैं इसलिए मैंने सोचा तुम्हारे पास समय नहीं है पैसे के लिए ऐतवार छुट्टी का दिन जो हमारा सभी के रिजर्व रहता है कुछ पल के लिए वह खामोश हो गये थे।

बेटा तुझे याद तो होगा बचपन मे कितना जिद्दी था कभी कभी मैं ऑफिस से घर थका-हारा आता था तब तूं मुझे घुमना है आप चलिए उस गार्डन में जहां पर झूला लगा हुआ है में चल देता था और आज जब मुझे तुम्हारी जरूरत है तब तुम्हारे पास मेरे लिए समय ही नहीं दर्द भरे स्वर में कहकर बात खत्म कर दी थी ।

अविनाश स्वाति दोनों को अपनी ग़लती का एहसास हो गया था लेपटॉप बन्द करके हम दोनों आप से माफ़ी मांगते हैं आप को समय खरीदने कि जरूरत नहीं है हम वादा करते हैं सुबह-शाम आप से खूब बातें करेंगे आप को हर रविवार घुमाने ले जाएंगे फिल्म देखेंगे शहर से बाहर हिल स्टेशन मंदिर जाएंगे हे ना स्वाति।

स्वाति ने चहकते हुए हां पापा आप से पक्का कहते हैं चलिए अभी तैयार हो घूमने चलते हैं हैं ना अविनाश?

हां पापा देर आए दुरुस्त आये कहते हैं सुबह का भूला शाम को घर आ जाऐ भूला नहीं कहलाता ।

दोनों का हृदय परिवर्तन देखकर रामनाथ जी खुश हो गए थे उनके हृदय से ढेरों आशीर्वाद निकल रहें थें।

सीख काम-काज के दबाव में हम अपने परिवार माता पिता को समय नहीं दे पाते हैं ठीक है काम करना चाहिए लेकिन साथ ही बड़े बूढ़े सदस्यों से भी बात करना चाहिए ऊनकी भावनाओं का ख्याल रखना चाहिए ।


बच्चों के पास पिता से बात करने का समय नहीं 

Comments

Popular posts from this blog

ज्ञान कि पांच बातें किस्सा

 प्राचीन समय कि बात थी ऐक नगर था जिसका नाम उज्जैनी था वहां का राजा तीर्थ यात्रा पर गया था जानें से पहले राज्य के सभी अधिकार राजकुमार को दे दिए थे राजकुमार बहुत दयालु था जो भी याचक राज दरबार में आता था सब को खुश होकर वापस जाते थे । ऐक दिन गरीब ब्राह्मण दरवार में आया था चूंकि उसे धन कि जरूरत थी बेटी का व्याह करना था राजकुमार ने पंडित का तथा उचित सत्कार करके कैसे आना हुआ आप कि क्या सहायता कर सकता हूं कृपया मुझे अवगत कराएं। ब्राह्मण ने कहा हे राजन् मुझे अपनी बेटी का व्याह करना है मेरे पास अन्न धन नहीं है में  आप के पास इसीलिए आया हूं । हां हां क्यों नहीं में अभी राजकोष से आप को धन देता हूं राजकुमार ने कहा था। हे राजन् में कभी मुफ्त में धन नहीं लेता अपनी और से उसके बराबर देकर लेता हूं हे में तुम्हें पांच ज्ञान कि बातें कागज पर लिखकर दे रहा हूं इन बातों को अकेले में ही पड़ना होगा और याद रखना होगा यह बातें सारे जीवन भर काम आएगी। पंडित जी ने कागज निकाल कर दीया था जिसमें लिखा था । ममता कि मां दोलत का पिता  बनी कि बहिन संकट का मित्र गाठी के दाम  आंखों के सामने जवान पत्नी ...

Father's last journey emotional story

 मध्य रात्रि का समय था आसमान में बादल छाए हुए थे हल्की हल्की रिमझिम रिमझिम बारिश हो रही थी ऐसे ही मौसम में वृद्ध आश्रम के कोने वाले पलंग पर ऐक बूढ़ा आदमी कराह रहा था।  शायद उसे ज्वर था तभी तो वह बार-बार करवटें बदल रहा था कभी कभी वह कुछ समय के लिए नींद के आगोश में चला जाता था जहां वह सपने में आसमान का विचरण करने लगता था कभी कभी वह अतीत कि सुनहरी यादें में खो जाता था । उन सुनहरी यादें में उसके चेहरे पर मुस्कान खिल जाती थी तब कभी वह अपने बुरे समय को याद करके सिहर उठ जाता था तब कभी अर्ध चेतना में कुछ बड़बड़ाने लगता था ऐसे ही वह अतीत में चला गया था। जी हां उसका नाम सेठ धनीराम था मुंबई में कपड़े का बहुत बड़ा व्यापार था खुद कि टेक्सटाइल कंपनी थी अनेकों नोकर चाकर थे बड़ा बंगला था बड़ी बड़ी महंगी गाड़ियां कारें थी । पत्नी थी तीन प्यारी प्यारी बेटियां जिन्हें उन्होंने बड़े लाड़-प्यार से पाल पोस कर तैयार किया था उस समय के सबसे अच्छे कालेज में पढ़ाया था  सब कुछ अच्छा चल रहा था लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था ।  अचानक उसे व्यापार में घाटा होने लगा था शायद बाजार से उसकी पकड़ कमज...

संपत्ति का बटवारा छोटा भाई विदेश में काम कर रहा था फिर वापस गांव......भावुक कहानी

मोहित इस बार कि किशमिस कि छुट्टी पर आप गांव जा रहें हैं प़ाची ने कोट पहनते हुए अमित से कहां था। लेकिन क्यों  क्यों कि आप को भाईसाहब से संपत्ति का बटवारा करवाना है ठीक है । प़ाची कैसी जिद पकड़ कर बैठ गई हों हम यहां अच्छा कमा रहे हैं और वहां गांव में भैया बेचारे खेती में बहुत मेहनत करके बच्चों का पालन पोषण कर रहे हैं। मैंने ऐक बार कह दिया ना कि आप को जाना हैं तब जाना हैं और हाथों हाथ सब बेचकर आना हैं मैंने यहां पर फ्लेट देख कर रखा है प्रॉपर्टी ब्रोकर से बात हो गई है तीन बैडरूम का लग्जरी फ्लेट हैं समझें बाप रे बाप अमेरिका में बर्फीली ऐसी ठंडी हाड़ कंपाने लगें है वह बड़बड़ाते हुए आफिस जाने के लिए तैयार हों रही थी। प़ाची मोहित पति-पत्नी थें दोनों ही अमेरिका कि मल्टिनैशनल कंपनी मैं साफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर काम कर रहे थें सालाना करोड़ों रुपए का पैकेज था  आर्थिक रूप से मजबूत थें। ठीक है बाबा अभी क्रिसमस की छुट्टियां बहुत दूर है सोचते हैं मोहित ने बात को आगे बढ़ाते हुए कहा था। में समझ गई आप बटवारा नहीं चाहते मेरी तो किस्मत ही फूट गई जो तुम्हारे जैसे के साथ व्याह किया सारे जीवन किराए...