प्राचीन समय कि बात है ऐक गांव था उस गांव में गरीब लकड़हारा अपनी मां के साथ रहता था मां जितना कहतीं थी उतना ही काम करता था जहां जाने को कहतीं थी चुपचाप चला जाता था अपनी बुद्धि विवेक से कोई भी काम नहीं करता था ।
ऐक दिन मां ने कहा कि बेटा ससुराल जाकर अपनी दुल्हन को ले आ और जहां सूर्य कि अंतिम किरण दिखाई नहीं दे वहीं छुपकर सोने लगना मतलब नींद में चले जाना फिर सुबह सूर्योदय होते ही ससुराल पहुंच जाना ।
लकड़हारा का नाम मूर्ख दास था जो उसके स्वभाव से कामकाज करने के तरीके से गांव वालों ने नामकरण संस्कार करके उसका रख दिया था ।
खैर मां ने रास्ते के लिए खाना ऐक पोटली में बांध दिया था और पानी का भरा हुआ घड़ा दें दिया था ससुराल जाते जाते वह घनघोर जंगल में पहुंच गया था ।
जहां उसे पुराना महल दिखाई दिया था जो कि जर्जर हालत में था उसके सामने बहुत सारे गधे बैठें हुए थे मूरख दास ने सभी गधो को महल के अन्दर बन्द कर दिया था फिर आगे चलता चलता शाम को ससुराल के घर के पीछे पहुंच गया था सूर्य अस्त हो गये थे मां के आदेशानुसार वह झाड़ियों में छुप गया था ।
ससुराल के घर कि दीवार से लगा हुआ नाई का घर था दोनों पति-पत्नी आपस में बात कर रहे थे कि नवलखा हार पत्थर के नीचे छुपा तो दिया है लेकिन वहां से लाए कैसे एक बार हाथ आ जाएं तब रातोंरात यह गांव छोड़ देंगे और दूर कहीं रहने लगेंगे।
दोनों घर के अन्दर कि सभी आवाजें उसे सुनाई दे रही थी सास ने उसकि पत्नी से कहा था कि बेटा डिनर कर ले रात का खाना खा लें तब पत्नी ने कहा कि रहने दिजियेगा मां मुझे भूख नहीं है बैसे भी दोपहर के कड़ी चावल ही तो अभी रखे हुए हैं ऐसा कहकर उसकि पत्नी भूखी ही सो गयी थी ।
सूर्य उदय कि पहली किरण के साथ वह ससुराल पहुंच गया था सास ससुर सभी ने उसका स्वागत किया था हाथ मुंह धोकर तैयार हो गया था सास ने जमाई नाश्ता कर लीजिए ।
तब मूर्ख दास ने रहने दिजिए मुझे भूख नहीं है बैसे भी कल के बासी कढ़ी चावल रखें हुए हैं ।
उसके बताने पर सभी आश्चर्यचकित रह गए थे कि कल के कड़ी चावल का इसे कैसे पता चला जरूर कोई अदृश्य शक्ति इनके पास है सारे गांव में हलचल मच गई थी सारे गांव में जंगल कि आग कि तरह यह खबर फैल गई थी।
उस राज्य के राजा कि रानी का हीरे-जवाहरात का हार चोरी चला गया था रानी गुस्सा होकर कोप भवन में बैठीं हुईं थीं राजा बहुत परेशान थे किसी ने राजा को मूरख दास का बताया था ।
तत्काल राजा ने सैनिकों को आदेश देकर मूर्ख दास को लाने के लिए बोला था सैनिकों कि टुकड़ी मूरख दास के पास पहुंच गयी थी सारा वृतांत समझकर मूरख दास ने कहा था कि ठीक है मैं चलूंगा लेकिन राजकिय सम्मान के साथ मतलब हाथी पर बैठकर ।
हाथी घोड़ा पालकी राजा ने भेजें थें मूर्ख दास आन बान शान से राजभवन पहुंच गए थे कभी आंख बंद करते तब कभी खोलकर उपर आसमान कि और देखनें लगते थे तब कभी दाएं बाएं बड़बड़ाते हुए मिल गया मिल गया हीरे-जवाहरात का हार मिल गया लेकिन राजन कुछ अदृश्य शक्ति को धन दान देना होगा।
ठीक है मैं दूंगा राजा ने हां भरते हुए कहा था।
तब ठीक है आप सैनिकों को भेजिए नाइन को पकड़िए उसने पत्थर के नीचे छुपा दिया है ।
हार मिल गया था मूर्ख दास कि जानकारी कि चर्चा दूर दूर दूसरे राज्यों में होने लगी थी दूसरे राज्य के कुम्हार के गधे खो गये थे वह भी आया था शांती से कुम्हार कि समस्या को सुनकर दाएं बाएं हाथ हिलाकर बड़बड़ाते हुए जंगल में महल महल बन गया खंडडर उसके गधे हैं उसके अंदर ज जा निकाल ला ।
कुम्हार के गधे मिल गये थे अब तों मूर्ख दास के पास पैसा था सम्मान था कुछ दिनों के लिए राजा ने पत्नी सहित उसे राजकिय अथिति बनाया था ।
जंगली शेर नरभक्षी हो गया था सारे राज्य में डर का माहौल बना हुआ था तब राजा ने मूर्ख दास से उस शेर को पकड़ने का आदेश दिया था नहीं पकड़ने पर सजा देने का भी कह दिया था मूरख दास पत्नी सहित चिंता में था।
खैर राजा का आदेश तों मानना ही था जहां से शेर का आना जाना था वह ऐक पेड़ के नीचे छुपकर बैठ गया था अंधेरे में कोई जानवर आते हुए दिखाई दिया था कुत्ता समझते हुए उसने कान पकड़कर पेड़ से बांध दिया था और सुबह सूर्योदय के इंतजार में दूसरे पेड़ के नीचे बैठ गया था।
सुबह सूर्योदय पर सेर को सैनिकों ने बंधा हुआ देखा था राजा के पास सूचना पहुंच गई थी राजा बहुत खुश हुआ था राजा ने मूरख दास कि तनख्वाह ऐक लाख टका पक्की कर दी थी साथ ही शर्त भी रखी थी कि जो काम कोई भी नहीं कर पाएगा उसे करके देना होगा।
दूसरे राज्य के राजा ने आक्रमण कर दिया था सेनापति और सैनिकों ने हार मान ली थी राजा ने मूर्ख दास से युद्ध भूमि में जाकर लड़ने के लिए कहां था मूरख दास चिंता में पड़ गया था पत्नी से कहा था लगता है अब नहीं बचूंगा नहीं जाउंगा तब भी मारा जाऊंगा और जाउंगा तब भी ।
पत्नी ने सलाह दी थी कि कोई लंगड़ा घोड़ा पर बैठ कर युद्ध भूमि में जाना आगे आगे सैनिकों कि टुकड़ी चलेंगी और पीछे पीछे तुम चलना मौका देखकर कही छुप जाना जब राजा को दूसरा राजा क़ैद कर लेगा तब भेष बदलकर आ जाना हम दोनों चुपचाप भाग जाएंगे ।
मूर्ख दास लंगड़ा घोड़ा पर बैठ कर युद्ध भूमि में चला गया था कहते है कि घोड़ा अगर ऐक पैर को उठा कर रखता है बहुत दोडता है युद्ध में घोड़ा चारों ओर भाग रहा था मूर्ख दास हबा में ही आंख बंद करके तलवार चला रहा था दुश्मन राजा ने समझा कि यह कोई बहुत शक्तिशाली योद्धा हैं हार मान कर वापस चला गया था ।
सीख चूंकि यह ऐक लोक कथा है मूरख दास मूर्खतापूर्ण कार्य तो करता था वह भी आत्मविश्वास के साथ जब आत्मविश्वास के साथ कोई भी काम किया जाता है किस्मत भी साथ देती यह कहानी मंनोरंजन के लिए लिखी गई है ।
लेखक का नाम महेन्द्र सिंह
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| मूर्ख आदमी ने आत्म विश्वास से किस्मत बदल ली |

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